ड्राइविंग इतनी खतरनाक हो चुकी है कि सड़क पर वाहन ले जाते वक्त अब डर लगने लगा है। हर साल हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा बैठते हैं। हालांकि भारत सरकार ने यातायात नियम तोड़ने के मामलों में जुर्माना बढ़ाने का प्रस्ताव करते हुए एक विधेयक संसद में पेश किया था। इसका मकसद दिनोंदिन खतरनाक होती जा रही यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।
भारत में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो वाहन चलाते वक्त यातायात नियमों का पालन करना तो दूर सामान्य अनुशासन और समझदारी भी नहीं दिखाते। इसी का नतीजा है कि यहां हर साल देश के करीब 90 हजार से ज्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। आंकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में जितने लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं उनमें से आठ प्रतिशत मौतें अकेले भारत में होती हैं। इस तरह भारत ऐसे देशों की सूची में टाप पर है, जहां सड़क दुर्घटनाएं काफी अधिक होती हैं। एक अनुमान के अनुसार भारत में वाहन चलाने वालों यानी चालकों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि फिलवक्त प्रति हजार पर 11 है, जो वर्ष 2011 के अत तक बढ़कर प्रति हजार पर 14 हो जाएगी। वर्तमान में यह बढ़ोत्तरी वर्ष 2000 के मुकाबले दो गुना से भी अधिक है। तब भारत में सिर्फ 0.5 प्रतिशत लोगों के पास कार हुआ करती थी। आज हर घर में कार नहीं सही, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवारों में बाइक का होना तो आम बात हो चुकी है। शादी-विवाह में दहेज के रूप में बाइक देने के प्रचलन ने बाइक की डिमांड में काफी बढ़ोत्तरी कर दी है। इतना ही नहीं, आज बेरोजगारी के इस दौर में कई जॉब भी ऐसे हैं, जिनमें बिना बाइक के ड्यूटी नहीं हो सकती। लिहाजा शौकिया नहीं तो मजबूरी ही सही, बाइक की डिमांड अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही है। शायद यही वजह है कि बाइक, कार आदि की एजेंसियों पर एडवांस बुकिंग का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। या यूं समझ लीजिए कि बिना एडवांस बुकिंग कराए मनपसंद बाइक या कार मिलना अब आसान नहीं रहा।
उधर, सरकार ने जो नया विधेयक पिछले दिनों संसद में पेश किया था उसमें प्रस्ताव किया गया था कि निर्धारित सीमा से ज्यादा गति से वाहन चलाने पर जुर्माना 10 डालर यानी करीब चार सौ रुपए से बढ़ाकर 25 डालर यानी एक हजार रुपए किया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति शराब के नशे में वाहन चलाता हुआ पाया जाता है तो उसे छह माह की जेल भी हो सकती है और पचास डालर यानी दो हजार रुपए जुर्माना हो सकता है।
ये तो बानगी भर है। इसी तरह के कुछ सख्त नियम कुछ वक्त पहले राजधानी दिल्ली में लागू किए गए थे, जिनका सड़कों पर असर भी नजर आने लगा था और यातायात में ज्यादा अनुशासन दिखता था। हालांकि यह भी एक शाश्वत सत्य है कि सख्त नियमों ने भ्रष्टाचार को पनाह देना शुरू कर दिया है। कारण कि पुलिस अमूमन यातायाता नियम तोड़ने वालों से रिश्वत लेकर उन्हें वहीं छोड़ देती है। लापरवाह ड्राइविंग हालांकि यहां के लिए कोई नई बात नहीं है। भारत में सभी तरह की सड़कों पर हर तरह के वाहन चलते हैं। पैदल से लेकर साइकिल, ट्रैक्टर, तेज रफ्तार कारें वगैरह-वगैरह...। और हां, अब जुगाड़ वाहन भी। ऐसा नजर आता है कि विभिन्न आकार और रफ्तार वाले वाहनों के बीच स्थान के लिए जद्दोजहद हो रही है। बसें, कारें, तिपहिया, हाथ से खींचकर चलने वाली गाड़ियों सभी अपनी-अपनी जगह बनाकर अपनी रफ्तार से चलते हैं। ऐसे में सड़कों पर चलने वाले पशुओं को भला कोई कैसे रोक सकता है। इतना ही नहीं, भारत की अर्थव्यवस्था में हो रही प्रगति का मतलब है कि निकट भविष्य में वाहनों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होती रहेगी। मजे की बात तो ये कि वाहन चलाने वाले बहुतेरे चालक सड़क दुर्घटनाओं को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेते। अक्सर देखा यह गया है कि सड़क दुर्घटनाएं लापरवाही से वाहन चलाने की वजह से ही हुई हैं। बहुत से मामलों में ऐसा भी होता है कि वाहन चलाने का न तो चालक के पास कोई तजुर्बा होता है और न ही उसने इसके लिए पर्याप्त अभ्यास ही किया होता है। जब ऐसे चालक किसी व्यस्त सड़क पर वाहन चलाने लगते हैं तो अक्सर इसका रिजल्ट दुर्घटना के रूप में ही सामने आता है।
वैसे तो युवा पीढ़ी में फर्राटेदार बाइक चलाना यूं कहें तो फैशन बन चुका है। बड़े रईस घरानों के दुलरुए बाइक को सड़कों पर चलाने के बजाय हाई स्पीड़ से हवा में उड़ाना शान समझते हैं। इससे सड़क पार करती महिला, बुजुर्ग और यहां तक कि बच्चे भी दुघर्टनाग्रस्त होकर असमय काल कवलित हो जाते हैं। वैसे ये दुलरुए मौका पाकर फरार हो जाने में भी काफी कुशल होते हैं। इतना ही नहीं, अगर ये लोगों के हाथ से बचकर पुलिस के हत्थे चढ़ भी गए तो धन और पैरवी इनके पास होती है। सोर्स इज फोर्स एंड मनी इज पावर का बखूबी इस्तेमाल करना रईस घरों के परिजनों को बखूबी आता है। इसके बाद पुलिसिया चंगुल से बेखौफ होकर छूटे ये दुलरुए अब भी सड़क के बजाय हवा में उड़ते रहना ही ज्यादा पसंद करते हैं। खैर, कुल मिलाकर ये विधेयक कितना कारगर साबित होगा, ये तो अभी वक्त बताएगा, लेकिन इतना तो तय है कि सड़क दुघर्टनाओं में कमी आने को लेकर अभी कोई प्रकाश की किरण नहीं दिख रही है। उसमें भी खास तौर पर भारत में जहां के युवा तो दूर अधेड़ भी यातायात नियमों को तोड़ना अपनी शान समझते हैं।






