2009 में तिहाड़ जेल से निकला एक आईएएस
तमाम कैदी कैद में ही पा रहें हैं डिग्री/डिप्लोमा
पांच और कैदी कर रहे आईएएस की तैयारी
अनीश कुमार उपाध्याय
तमाम कैदी कैद में ही पा रहें हैं डिग्री/डिप्लोमा
पांच और कैदी कर रहे आईएएस की तैयारी
अनीश कुमार उपाध्याय
तिहाड़ । इसका नाम आते ही सहज ही दिमाग में एक खाका बनता है। लंबी-चैड़ी दीवारें। दीवारों के पीछे कई कोठरियां। इसमें सजा काट रहे तमाम खूंखार और नामी गिरामी डकैत, बदमाश, हत्यारे वगैरह-वगैरह। अगर आपसे ये कहा जाए कि इन्हीं दीवारों के पीछे इन दिनों ये कैदी सरस्वती की साधना कर रहे हैं तो एकबारगी आपको विश्वास न हो। जी हां, यकीन करिए, यही हकीकत है।
कैदी भविष्य बना रहे उज्ज्वल
यहां सजा काट रहे कई कैदी डिग्री और डिप्लोमा कोर्स कर अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने की मुहिम में जुटे हैं। इतना ही नहीं, वर्ष 2009 में इसी तिहाड़ जेल में रहकर एक कैदी ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा आईएएस में सफलता हासिल की है। इतना ही नहीं, जेल की दीवारों में अभी पांच और कैदी कुछ ऐसा ही सपना संजोए दिन-रात एक कर सफलता पाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। तिहाड़ जेल में सरकारी संगठन और एनजीओ की मदद से शिक्षण कार्य संचालित किया जा रहा है।
जेल की दीवारों में भी हौसले बुलंद
कौन कहना है कि आसमां में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों। इसे हकीकत में बदलने की मुहिम में तिहाड़ जेल में कैद पांच कैदी पूरे मनोयोग से जुटे हैं। कत्ल के आरोप में कैद मणिपुर के गजियाओ के जार्ज प्रशासनिक सेवा में आने के बाद देश के उपेक्षित अपने राज्य की क्षमता को आगे बढ़ाने की मंशा रखते हैं। वे प्रदेश के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देना चाहते हैं। वहीं धोखाधड़ी के आरोप में सजा काट रहे बिलासपुर छत्तीसगढ़ के सिद्धार्थ सिंह सीदर खडगपुर आईआईटी से पास आउट हैं और उनका दावा है कि जेल में जितना वक्त उन्हें पढ़ने के लिए मिल जाता है, घर पर शायद ही मिल पाता। अपहरण के आरोप में कैद में रहकर आईएएस की तैयारी कर रहे बिहार के अमित झा के हौसले भी बुलंद हैं। कानपुर के राठौर और संदीप कहते हैं कि जेल की दीवारों में वे जरूर कैद हैं, लेकिन उनके सपने आजाद हैं।
इग्नू-एनआईओएस ने संभाली कमान
इंदिरा गांधी नेशनल ओपेन यूनिवर्सिटी इग्नू नई दिल्ली और नेशनल इंस्टीटयूट आॅफ ओपेन स्कूलिंग एनआईओएस दिल्ली ने क्रमशः 2640 और 1900 छात्रों को शिक्षा दी है। यहां कैदियों के लिए कंप्यूटर टेनिंग सेंटर भी संचालित किया जा रहा है। यहां से बीए, बीकाम, क्रिएटिव राइटिंग इन इंग्लिश में डिप्लोमा, मानवाधिकार में सार्टिफिकेट कोर्स, मास्टर इन टूरिज्म, मैनेजमेंट, कंप्यूटर, पीजी डिप्लोमा इन डिस्टेंस एजुकेशन आदि की शिक्षा ये कैदी हासिल कर रहे हैं।
वोकेशनल क्लास भी हो रही संचालित
इतना ही नहीं वोकेशनल क्लास के रूप में हिंदी, इंग्लिश टाइपिंग, कामर्शियल आर्ट आदि की शिक्षा भी यहां के कैदियों को दी जा रही है। इसका प्रमाण पत्र डायरेक्टेट आफ टेनिंग एंड टेक्निकल एजुकेशन की ओर से जारी किया जा रहा है।
कैदी सीख रहे योग के गुर
वहीं वर्ष 1994 में तिहाड़ जेल नंबर चार में 10 दिवसीय योग और मेंडेटेशन से जुड़े दो कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। छह माह का कंप्यूटर कोर्स एनजीओ स्टरलाइन फाउंडेशन की मदद से तैयार हैं। ये कोर्स पात्रता रखने वाले कैदियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा गांधीवादी दर्शन के प्रसार के लिए तिहाड़ जेल में एक गांधी सेंटर गांधी स्मृति और दर्शन समिति द्वारा इग्नू वार्ड में सरकार की ओर से स्थापित किया गया है। खास यह भी कि गांधीवादी दर्शन पर पांच सौ से अधिक पुस्तकें पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।
30 प्रतिशत कैदी अभी भी निरक्षर
अब यदि तिहाड़ में कैदियों की स्थिति पर नजर डालें तो खाका आसानी से समझा जा सकता है। तिहाड़ के सभी जेलों में मौजूदा दौर में करीब 12 हजार कैदी हैं। इनमें से लगभग 30 प्रतिशत ऐसे कैदी भी हैं, जिनके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है। जेल नंबर सात में तो करीब एक हजार कैदियों में से 200 अनपढ़ हैं।
जेल प्रशासन ने संभाली शिक्षा की कमान
कैदियों को शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था जेल प्रशासन ने संभाल रखी है। इनकी शिक्षा व्यवस्था का खर्च जेल प्रशासन ही वहन करता है। इतना ही नहीं यूनिफार्म और जूते भी जेल प्रशासन ही उपलब्ध कराता है। कैदियों को पढ़ने के लिए चेयर और डेस्क की भी मुकम्मल व्यवस्था है। इन कैदियों को पढ़ाने के लिए शिक्षक एचआरडी मिनिस्टी से आते हैं।
रोजाना दो बैच में लगती क्लास
जेल में कैदियों की रोजाना दो बैच में क्लास लगती है। शिक्षक इन अनपढ़ कैदियों को हस्ताक्षर करने,अखबार, बुक्स वगैरह पढ़ने तथा लिखने की बेसिक जानकारी उपलब्ध कराते हैं। जेल नंबर सात में 18 से 21 साल के कैदी स्काई ब्लू शर्ट और डार्क ब्लू पैंट पहनकर बकायदा शिक्षा लेते हैं।
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शिक्षा की है मुकम्मल व्यवस्था
डीजी जेल नीरज कुमार ने बताया कि जेल में कैदियों की शिक्षा के मुकम्मल बंदोबस्त की कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाती। सरकार ही नहीं, जेल के अधिकारी और कर्मचारी भी कैदियों की शिक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं। जो भी सुविधाएं इन कैदियों को चाहिए, वो सब यहां उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का भी कैदियों की शिक्षा पर पूरा ध्यान है। लिहाजा यही वजह है कि यहां आईएएस जैसी परीक्षा की तैयारी भी कैदी करते हैं और एक कैदी इसमें सफलता भी पा चुका है। उस कैदी का नाम बताने से इनकार करते हुए उन्होंने इतना जरूर बताया कि बलात्कार के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे उस कैदी ने जब आईएएस की परीक्षा में सफलता पाई तो दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 में उसकी सजा माफ कर दी । उन्होंने आश्वस्त किया कि आगे भी अगर इससे बेहतर सुविधाएं कैदियों को दी जाएंगी।
इनसेट---
तिहाड़ जेल में कैदियों की आयुवार स्थिति
उम्र पुरूष महिला
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18 से 21 साल 1199 25
21 से 30 साल 5893 110
30 से 50 साल 3593 273
50 से 65 साल 516 59
65 वर्ष से उपर 58 12
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कुल कैदी 11259 479
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सर्वयोग 11738
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आईएएस की तैयारी में जुटे हैं ये कैदी
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नाम पता आरोप
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जार्ज गजिआओ, मणिपुर कत्ल
सिद्धार्थ सिंह सीदर बिलासपुर, छत्तीसगढ़ धोखाधड़ी
अमित झा बिहार अपहरण
राठौर कानपुर, उत्तर प्रदेश ---
संदीप कानपुर, उत्तर प्रदेश हत्या
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नोटः ये सभी कैदी तिहाड़ जेल के बैरक नंबर तीन में रहकर अपनी तैयारी कर रहे हैं।


