चले थे हज बख्शवाने, रोजे पड़ गए गले
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने लगाया मनरेगा में धांधली का आरोप
जयराम ने जिस एनजीओ को बनाया आधार, उसी ने झाड़ा पल्ला
मनरेगा में भ्रष्टाचार को लेकर दर्ज किए गए थे 10 एफआईआर
मीडिया को चिट्ठी लीक होने की खबर से नाराज हुए सीएम माया
मनरेगा को लेकर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस व प्रदेश की मुखिया मायावती के बीच चल रही महाभारत में कोई पीछे हटने का तैयार नहीं है। वहीं केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश जिस एनजीओ को आधार बनाकर मायावती को लपेट रहे थे, उसी एनजीओ ने ऐसी किसी भी जानकारी से इनकार कर केंद्रीय मंत्री को कटघरे में ला खड़ा किया है।
अनीश कुमार उपाध्याय/ दिल्ली
केंद्र और यूपी सरकार के बीच चल रही सियासी जंग के बीच अब मनरेगा एक नया मुद्दा बन गया है। उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने योजना की धनराशि के दुरुपयोग पर सीबीआई जांच की जरूरत से इंकार करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए पीएम मनमोहन सिंह को पत्र लिखा। वहीं रमेश ने भी पलटवार करते हुए कहा कि वे यूपी सरकार के आरोपों पर कोई जवाब नहीं देंगे। खैर, मनरेगा को लेकर केंद्र व यूपी सरकार में छिड़ी महाभारत का मामला पीएम दरबार में है। जबकि केंद्रीय मंत्री जिस एनजीओ के सहारे सीएम को कटघरे में खड़ा कर रहे थे, उसी एनजीओ ने उनके दावे का खंडन भी कर दिया है। लिहाजा केंद्र सरकार एक बार फिर बगले झांकते दिख रही है।
क्या था मामला
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को मनरेगा योजना में राज्य में एक बड़े घोटाले का हवाला देते हुए एक पत्र लिखा। वनांगना एनजीओ को आधार बनाकर लिखे गए खत में उन्होंने मनरेगा के धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। खास तौर पर प्रदेश के सात जिलों यथा बलरामपुर, गोंडा, महोबा, सोनभद्र, संत कबीर नगर, कुशीनगर और मिर्जापुर में मनरेगा के धन के दुरुपयोग का आरोप सूबे की बसपा सरकार पर लगाया। बलरामपुर में जहां 2007-08 में विभिन्न पंचायतों में 1.5 लाख से अधिक कैलेंडर प्रत्येक 31 रुपये की लागत से मनरेगा के धन से खरीदा गया। इसके अलावा 80 लाख रुपये के प्राथमिक चिकित्सा बक्से, सात लाख रुपये के टेंट भी खरीदे गए। वहीं गोंडा में इसी सत्र में पंचायतों में 37 लाख रुपये के खिलौने खरीदे गए। वहीं 1.09 करोड़ के टेंट की खरीद हुई। अधिकांश खरीद उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड से बिना निविदा के खरीदे गए थे। इसी क्रम में कुशीनगर में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। मिर्जापुर में चार करोड़ रुपये गबन का आरोप लगाया गया। उधर, सोनभद्र में भी 250 करोड़ रुपये के दुरुपयोग व गबन का आरोप लगाया गया था।
...फिर शुरू हुई घेरने की कवायद
पत्र में दिए गए अनाप-शनाप खर्च के आंकड़े बयां कर रहे हैं कि यूपी में मनरेगा के धन में जमकर धांधली की गई है। कांग्रेस ने इसे ही आधार बनाकर यूपी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने रमेश की तरफदारी करते हुए कहा है कि ग्रामीण विकास मंत्री का खत तथ्यों पर आधारित है और तथ्य कभी झूठ नहीं बोलते। खास यह कि अभी चार दिन पहले ही केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने मुख्यमंत्री मायावती को यूपी में मनरेगा की बदहाली और धांधली पर लंबा-चौड़ा पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने यूपी के सात जिलों में मनरेगा में फंड के दुरुपयोग की बात कहते हुए मामले की सीबीआई जांच का सुझाव तो दिया ही, साथ ही आगे के लिए फंड रोकने की भी चेतावनी दे डाली।
एनजीओ ने भी झाड़ लिया पल्ला
अभी ये मामला चल ही रहा था कि अचानक नाटकीय ढंग से मामले की हवा निकल गई। हुआ ये कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश जिस एनजीओ को आधार बनाकर यूपी की माया सरकार पर आग्नेयास्त्र छोड़ रहे थे, उसकी हवा उसी एनजीओ ने निकाल दी। रमेश ने यूपी की सीएम मायावती को मनरेगा में हुई गड़बड़ियो के मद्देनजर लिखी चिट्ठी में वनांगना एनजीओ का जिक्र किया था। इस एनजीओ से मिले फीडबैक का हवाला देते हुए जयराम ने माया सरकार से यूपी में मनरेगा को लेकर हो रही धांधली की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी। वहीं वनांगना एनजीओ ने दावा किया है कि उसने जयराम रमेश को इस तरह का कोई फीडबैक दिया ही नहीं है। एनजीओ संस्थापक सदस्य माधवी कुकरेजा ने बताया है कि इसी साल सितंबर में दिल्ली में मनरेगा पर सम्मेलन में उन्होंने इस स्कीम में दलित महिलाओं की भागीदारी के मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। रमेश इस कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट मौजूद थे। मगर उन्होंने न तो मनरेगा में गड़बड़ी या धांधली जैसी कोई बात उठाई थी और न ही सीबीआई जांच की मांग रखी थी। माधवी के मुताबिक रमेश ने अपनी चिट्ठी में यूपी के सोनभद्र व महोबा जैसे जिन जिलों में हो रही कथित गड़बड़ियो का जिक्र किया है, वहां तो उनका संगठन काम भी नहीं करता है। उन्होंने राजनीतिक शक्ल ले चुके इस मसले में अपने संगठन को लपेटे जाने पर सख्त ऐतराज भी जताया है।
चिट्ठी लीक होने से खफा सीएम
मायावती का कहना है कि केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश की चिट्ठी उन्हें मिलने से पहले मीडिया को दे दी गई। हालांकि रमेश का पत्र मिलने के बाद सीएम ने चार जिलों क्रमश: बलरामपुर, गोंडा, मिर्जापुर और महोबा में गड़बड़ियों की जांच आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्लू से कराने के निर्देश दे दिए हैं। सीएम ने कहा है कि राज्य की एजेंसियां भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने में सक्षम हैं। कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने भी बताया है कि सीएम मायावती ने पीएम को इसके लिए पत्र भेज भी दिया है। इसमें बताया गया है कि किस तरह प्रदेश सरकार ने किस तरह योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया है। मायावती ने बताया है कि राज्य सरकार ने पहले से ही उपलब्ध धनराशि का 60 फीसदी धन खर्च कर लिया है। वहीं दूसरी किस्त के लिए जरूरी अभिलेखों के साथ मांग भेजी गई है। सीएम ने पीएम से अनुरोध किया कि वे इस मामले में दखल कर धनराशि समय से रिलीज कराने की पहल करें ताकि योजना पर अमल समय में हो सके। नसीहत दी है कि जरूरतमंद परिवारों को रोजी-रोटी उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य दोनों को एक साथ खड़ा होना होगा।
10 एफआईआर दर्ज
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने जिन सात जिलों में गड़बड़ियों की शिकायत की है, मुख्यमंत्री ने वहां जांच शुरू करा दी है। अब तक 18 प्रथम श्रेणी, 13 द्वितीय श्रेणी और 43 तृतीय श्रेणी के अधिकारियों के साथ ही 236 फील्ड लेबल कर्मचारियों के विरूद्ध निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। वित्तीय अनियमितताओं के 71 एफआईआर दर्ज कराए गए हैं। इसके अलावा 53.97 लाख रुपये की धनराशि की वसूली की गई है। वहीं 131 लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई की जा रही है। ये मामले इसकी गवाही दे रहे हैं कि कहीं न कहीं शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगाया गया है। मामला भले ही सूबे की मायावती सरकार और केंद्र सरकार के बीच बहस का मुद्दा हो, लेकिन जिस मकसद से ये योजना अस्तित्व में आई, उसकी कलई कम से कम इस बहस के जरिये यूपी में तो खुल ही चुकी है।
इनसेट...
जयराम के लगाए गए आरोप
-मनरेगा योजना के फंड का यूपी सरकार ने किया है दुरुपयोग।
-कई जिलों में खिलौने, कैलेंडर, टेंट की खरीद में किए गए करोड़ों खर्च।
-बिना टेंडर व मानकों के विपरीत प्रदेश सरकार ने की है खरीद।
-पूरे मामले की सीबीआई जांच क्यों नहीं की जा सकती।
मायावती की ओर से दिए गए जवाब
-ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट बीते चार साल में यूपी में मनरेगा के कामों को बेहतर बता रही है।
-केंद्रीय मंत्री जयराम की ओर से मनरेगा संबंधी भेजा गया खत राजनीति से प्रेरित है।
-जो पत्र उन्हें पहले मिलना चाहिए था, उससे पहले वह मीडिया में पहुंच गया।
-भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए राज्य की एजेंसियां सक्षम है। इस मामले में सीबीआई जांच नहीं होगी।
-मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी गई। जांच एक एसपी के नेतृत्व में गठित टीम करेगी। प्रदेश सरकार ने मामले में संलिप्त कई निचले अधिकारियों को किया निलंबित।
-बलरामपुर, गोंडा, मिर्जापुर, महोबा में ईओडब्ल्यू की जांच के निर्देश
-कई अधिकारियों पर गिराई गई गाज
-जयराम के आरोप को कांग्रेस ने ठहराया जायज। कहा, कभी झूठ नहीं बोलते जयराम।
इनसेट...
किसने क्या कहा...
जयराम रमेश के पत्र में लगाए गए आरोप और उठाए गए बिंदु राजनीति से प्रेरित हैं। रमेश का पत्र राज्य सरकार को प्राप्त होने से पहले मीडिया में पहुंचाना उनकी मंशा का जाहिर करता है।
शशांक शेखर सिंह, मंत्रिमंडलीय सचिव, उत्तर प्रदेश
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश की ओर से भेजे गए खत पर मायावती ने शोर ज्यादा मचाया है, जबकि उसके जवाब में तथ्य नहीं दिए हैं।
मनु सिंघवी, कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता
मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार की जांच पर कांग्रेस व बसपा नूरा कुश्ती कर रही हैं। हाईकोर्ट की देखरेख में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच होनी चाहिए। चुनावी माहौल में मनरेगा को लेकर केंद्र और राज्य के बीच तलवारें खिंचना उनकी मिलीभगत है। ऐसा नहीं होता तो आखिर कल तक बसपा पर मेहरबान रही कांग्रेस को अचानक यूपी में भ्रष्टाचार की चिंता कैसे सताने लगी?
मुख्तार अब्बास नकवी
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा
अपना दामन पाक-साफ बताने वाली प्रदेश की मायावती सरकार को जांच से आखिर किस बात का डर है? विधानसभा चुनाव से पहले दूध का दूध और पानी का पानी अगर उन्हें करना है तो आज ही पत्र लिखकर सीबीआई जांच की सिफारिश कर देनी चाहिए।
श्रीप्रकाश जायसवाल,
केंद्रीय कोयला मंत्री






