पूर्वांचल के गठन से मुसलमानों को कोई फायदा नहीं
उद्योग के हिसाब से मिल सकती थोड़ी-बहुत राहत
कई विभिन्न दलों में बंटना मुसलिमों के लिये घातक
एकजुटता का प्रदर्शन बखूबी नहीं कर पाते मुस्लिम
नये प्रदेश में 10 साल तक कोई परिवर्तन संभव नहीं
उत्तर प्रदेश के चार टुकड़े होने के बाद भी पूर्वांचल के मुसलमानों की तकदीर संवरती नहीं दिख रही। हां, अगर पूर्वांचल राज्य गठन के बाद यहां की सरकार अगर इनको कारोबार करने में तवज्जों दे तो उन्हें थोड़ा सुधरने का अवसर जरूर मिलेगा। पूर्वांचल में जहां-तहां छितराये ये मुसलमान अगर लामबंद भी होते हैं तो ये अपना बहुत करिश्मा नहीं दिखा पायेंगे। मौजूदा हालात को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि आगामी एक दशक तक इनके भाग्य में कोई परिवर्तन संभव नहीं है।
अनीश कुमार उपाध्याय/ दिल्ली
उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की कवायद इन दिनों जोरों पर है। खास तौर पर वाराणसी, बलिया, गाजीपुर आदि क्षेत्रों में इसकी चर्चा है कि पूर्वांचल राज्य गठन के बाद मुसलमानों का भविष्य क्या होगा। राजनीतिज्ञों की मानें तो यूपी के बंटवारे के बाद बनने वाला अलग पूर्वांचल राज्य में मुसलमानों को फिलहाल कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। कारण कि जो स्थिति उत्तर प्रदेश के दौरान थी, वही अब भी बरकरार रहेगी। हालांकि उद्योग के हिसाब से उन्हें थोड़ा सुधरने का अवसर जरूर मिलेगा।
आखिर ऐसा क्यों?
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी करीब पांच करोड़ के आसपास है। प्रदेश के चार हिस्सों में बंट जाने से पूर्वांचल के हिस्से में 15.35 फीसदी मुसलमान आएंगे। हालांकि मुसलमान धार्मिक ऐतबार से हमेशा एकजुटता का प्रदर्शन करता आया है, लेकिन अंत में यही तबका बिखर जाता है। नतीजा वह न तो अपना रहनुमा चुन पाता है और न ही अपनी जमीन ही बना पाता है। वाराणसी के राजनीतिक विचारक जहांगीर आलम एडवोकेट बताते हैं कि कहीं-कहीं मुसलमान एकजुटता भी दिखाते हैं। चुनाव में भी यही एकजुटता होती है, लेकिन अलग-अलग तरीके से।
मुसलमानों की बढ़ जायेगी जिम्मेदारी
मुसलिम रिजर्वेशन मूवमेंट के प्रदेश संयोजक जफरयाब जिलानी का कहना है कि नये प्रदेश में करीब 10 साल तक कोई भी परिवर्तन के संकेत नहीं दिखेंगे। पूर्वांचल बनने से नये उद्योग-धंधों के विकास के अवसर इनके ऊपर उठने की वजह बन सकते हैं। कारण कि नये प्रदेश में वाराणसी, मऊ, आजमगढ़, बलिया, गोरखपुर समेत 26 जिले शामिल होंगे। वहीं कौमी एकता दल के प्रदेश अध्यक्ष अतहर जमाल लारी का दावा है कि राजनैतिक दृष्टि से मुसलमानों का नये प्रदेश में अहम रोल रहेगा। नये प्रदेश में तो उनकी संख्या 25 प्रतिशत रहेगी, तो वह इस मुद्दे पर अहम फैसला ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल राज्य बन जाने से मुसलमानों की भी प्रदेश के विकास में जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। अधिकतर तबका बुनकर का होगा, जो अपने हुनर से प्रदेश की आर्थिक स्थिति में भी सहयोग देने से पीछे नहीं हटेगा।
ऐसी होगी तस्वीर
यूपी में फिलहाल मुस्लिमों की कुल आबादी18.50 फीसदी है। वहीं अगर पूर्वांचल की बात करें तो यहां मुस्लिमों की कुल आबादी15.35 फीसदी है। इसी क्रम में प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य में मुस्लिम पुरुषों की कुल आबादी 15.24 फीसदी है, जबकि मुस्लिम महिलाओं की आबादी 15.47 फीसदी। कुल मिलाकर अगर ये मुस्लिम एकजुटता दिखायें तो काफी कुछ बदलाव कर सकते हैं, लेकिन अब इसके आसार दूर-दूर तक नहीं दिख रहे। खास तौर पर पूर्वांचल राज्य में विभिन्न छोटे-छोटे कौमी दलों के गठन ने इन्हें और छितरा दिया है। अब वे किसी भी एक दल पर आश्रित न होकर कई छोटे-छोटे दलों में बंट चुके हैं।
दलों के दलदल में धंस गये मुसलमान
अगर पूर्वांचल की बात वर्तमान दौर को ही लेकर करें तो मुस्लिम खेमा कई पार्टियों में विभक्त हो चुका है। विभिन्न राजनैतिक दल भी इनका मत हथियाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। एक ओर बसपा जहां मुस्लिम मतों को रिझाने में जुटी है, वहीं सपा भी इन्हें अपना बता रही है। भाजपा और कांग्रेस भी मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह-तरह की कवायद करने में जुटे हैं। उधर, मुस्लिमों के बीच कभी गहरी पैठ रखने वाले अंसारी बंधुओं ने कौमी एकता दल के नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन कर रही-सही कसर भी पूरी कर दी है। लिहाजा ये छितराये मुसलमान किसी एक दल के नहीं रह गये हैं।
लग सकता है जोर का झटका
पूर्वांचल राज्य गठन के बाद अगर मुसलमानों ने एकजुटता का परिचय नहीं दिया तो उन्हें जोर का झटका भी लग सकता है। कारण कि अगर इस बिरादरी ने किसी भी एक दल की सवारी नहीं की और बिखर गये तो फिर इसका खामियाजा उन्हें काफी बरसों तक भुगतना पड़ सकता है। आज जो राजनैतिक पार्टियां उन्हें सिर-आंखों पर बिठाने के लिये बेचैन हैं, वे इन डोरे डालने के बजाय किसी सशक्त कौम को अपना बनाने की मुहिम में जुट सकते हैं। खास तौर पर गाजीपुर, बलिया, वाराणसी आदि क्षेत्रों के दौरे के बाद जो तस्वीर उभरकर सामने आई उसमें ये स्पष्ट हो गया कि ये वक्त मुसलमानों के लिए काफी अलर्ट रहने वाला होगा।
पूर्वांचल के गठन से बिखरना तय
गाजीपुर, बलिया की सरजमीं पर कई राजनीतिक दलों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पूर्वांचल राज्य गठन के बाद अगर मुसलमान बिरादरी दो से अधिक दलों में बंटती है तो उनका वह दबदबा खत्म हो जायेगा, जो इनके वजूद का गवाह रहा है। वैसे भी विभिन्न राजनैतिक दिग्गजों के वर्चस्व एवं राजनैतिक दलों की बढ़ी सक्रियता की वजह से इनका मात खाना तय माना जा रहा है। अगर पूर्वांचल में इनकी औकात घटी तो फिर मुस्लिम बिरादरी को निचले पायदान पर जाने से कोई ताकत रोक नहीं सकती। ऐसे में यदि वक्त रहते इस बिरादरी ने किसी एक दल को नहीं चुना तो उन्हें इसका दीर्घकालीन दुष्परिणाम भुगतना तय है।
प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य में मुसलमानों की स्थिति
जिला आबादी प्रतिशत पुरुष महिला
प्रतापगढ़ 13.70 13.57 13.83इलाहाबाद 12.72 12.56 12.90बहराइच 34.83 34.40 35.33गोंडा 19.26 18.85 19.71फैजाबाद 14.57 14.33 14.83अंबेडकर नगर 16.39 16.42 16.36सिद्धार्थनगर 29.43 28.56 30.34महाराजगंज 16.46 16.20 16.74बस्ती 14.70 14.17 15.27गोरखपुर 9.15 9.16 9.15
कुशीनगर 16.86 16.66 17.06
कौशांबी 13.51 13.29 13.76देवरिया 11.38 11.21 11.55मऊ 19.14 19.15 18.93आजमगढ़ 15.07 15.15 15.00बलिया 6.57 6.54 6.61जौनपुर 10.20 10.30 10.11संत रविदास नगर 11.96 12.12 11.80संत कबीर नगर 24.02 23.54 24.52वाराणसी 15.85 15.95 15.74गाजीपुर 9.89 9.89 9.88मिर्जापुर 7.48 7.44 7.52सोनभद्र 5.40 5.40 5.41श्रावस्ती 25.60 25.02 26.26बलरामपुर 36.72 35.59 37.97चंदौली 10.24 10.24 10.24---------------------------------------------------------------

