श्री गणेशाय नमः

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Wednesday, August 1, 2012

...खून के बदले खून नहीं, बस नजर से उतार दिया

अनीश कुमार उपाध्याय / जमानिया [गाजीपुर] : बात काफी पुरानी है। जमानिया के बघरी गांव के एक बुजुर्ग की करीब 250 वर्ष पहले बरुईन गांव के लोगों ने हत्या कर दी। बघरी के लोगों ने बदले में कोई खून-खराबा नहीं किया। लेकिन बरुईन के लोगों को नजर से ही उतार दिया। इस सामाजिक बहिष्कार के फलस्वरूप आज गांव की नौंवी पीढ़ी के लोग भी उस गांव का अन्न-जल ग्रहण नहीं करते। बरुईन महाविद्यालय में बघरी के लड़के-लड़कियां पढने जरूर जाते है, लेकिन वहां का पानी भी नहीं पीते। दोनों गांवों के बीच दरार के पीछे एक लम्बी कहानी गांव के बुजुर्ग बताते है। दोनों गांवों के जमींदारों के बीच सीमांकन को लेकर विवाद हो गया। मामला गोरी हुकूमत के यहां पहुंचा। उसने अजीबोगरीब फैसला सुनाया। तय किया जमानिया तहसील के पूरब व दक्षिण से बघरी के मौजा की शुरुआत होती है। यहां से दोनों गांव का जो व्यक्ति हथेली पर शुद्ध घी लगे पीपल के पत्ते पर आग में तपाकर लाल किया गया लोहे गोला रख जहां तक एक दिन में दौड़ लगाएगा, उतनी जमीन उस गांव की हो जाएगी। बरुईन के ग्रामीणों ने हाथ पीछे खींच लिए। बघरी के नृपति तिवारी ने साहस दिखाया। आग में तपा गोला नृपति तिवारी ने हथेली पर रखकर दौड़ना शुरू किया। उन्होंने 16 सौ बीघा भूमि नाप डाली। बरुईन के जमींदारों को आशंका हुई कि नृपति बघरी गांव ही नाप लेंगे। इस पर जमींदारों में से किसी ने नृपति के सिर पर लाठी से प्रहार कर दिया। वे बघरी-बरुईन गांव के बीच की एक गड्ढे के पास गिरे और उनकी मृत्यु हो गयी। खैर, नृपति की ओर से नापी गई भूमि तो बघरी गांव को मिल गई। इसे 16 सौ बीघा का मौजा कहा जाता है। मान्यता है मौत के बाद नृपति किसी के सपने में आए और अपनी मौत वाली जगह पर चौरा बनाने का निर्देश दिया। साथ ही चेताया गांव का कोई भी व्यक्ति बरुईन गांव का पानी नहीं पीएगा। ऐसा नहीं करने पर अनिष्ट होगा। स्वप्न की बात परंपरा बन गई। करीब नौ पीढि़यों के बाद भी गांव का कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी जाति-बिरादरी का क्यों न हो, बरुईन का पानी नहीं पीता। मान्यता है भूल या अन्य कारण से किसी ने दुस्साहस भी किसी ने किया तो उसकी हानि तय है। गांववासी न तो उस गांव का पानी पीते है, न दाना खाते है। अपने बेटे-बेटियों की शादी भी इस गांव में नहीं करते।
मिथक तोड़ने का प्रयास विफल
अंधविश्वास बता मिथक को तोड़ने के कई प्रयास भी हुए, लेकिन सब विफल। ग्रामीण बताते है बघरी के अंतू राम ने करीब 17 साल पहले बरुईन गांव में शादी की। शादी क्या हुई परिवार पर मुसीबत ही टूट पड़ी। जब कभी इस परिवार में मांगलिक बेला का आगाज होता कोई न कोई अनहोनी हो जाती।
-02 Sep 2008, दैनिक जागरण