भारत-पाक संबंधों की खटास कोई नई बात नहीं है। इस बीच परिस्थितियों को सामान्य करने की लाख कोशिश हुई, लेकिन हर बार भारत को धोखा ही मिला। यह बात दीगर है कि आज भी पाक कई मामलों में भारत पर ही निर्भर है। कम से कम बिजली के मामले में उसे एक बार फिर भारत के पास ही आना पड़ा है। एक रिपोर्ट...
अनीश कुमार उपाध्याय/ दिल्ली
अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा, तो काफी हद तक संभव है कि भारत में तैयार बिजली का झटका पाकिस्तान में महसूस किया जाएगा। चौंकिए मत! पाकिस्तान की नई सरकार भारत से अगले दो साल में करीब एक हजार मेगावॉट बिजली इंपोर्ट कर सकती है। देश में व्याप्त बिजली संकट को दूर करने के लिए पाकिस्तान इस योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस्लामाबाद के रहने वाले वर्ल्ड बैंक के एक अधिकारी के मुताबिक बिजली इंपोर्ट करने की संभावना को देखते हुए फिजिबिलिटी सर्वे भी कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि भारत, ईरान और अन्य सेंट्रल एशियाई देशों से पाक में बिजली आयात किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि देश के आर्थिक विकास को पटरी पर लाने के लिए ऐसा किया जाना बेहद जरूरी है। सत्ता पर काबिज होने की तैयारी कर रही नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल (एन) बिजली संकट को दूर करने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रही है।
यह है हालात
पाकिस्तान के मौसम में गर्मी की तेजी के साथ ही बिजली संकट भी गहराता जा रहा है। पाकिस्तान को हर दिन छह हजार मेगावॉट की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालात इस कदर हैं कि देश के विभिन्न शहरों और कस्बों में कई घंटों की लोड शेडिंग की जा रही है। इससे आम जनजीवन काफी प्रभावित हो रहा है। बिजली प्रदाता कंपनी पाकिस्तान इलेक्ट्रिक पॉवर कंपनी (पेपको) के अनुसार पाकिस्तान में बिजली का उत्पादन घटकर प्रतिदिन महज 10 हजार मेगावॉट रह गया है। वहीं इसके सापेक्ष बिजली की मांग 16 हजार मेगावॉट तक पहुंच चुकी है। ऐसे में इस समय पाकिस्तान में छह हजार मेगावॉट बिजली की कमी है। पेपको के पास तेल खरीदने के लिए धन नहीं है। इससे देश के विभिन्न शहरों में करीब 10 ग्रिड स्टेशन बंद पड़े हैं। इस समस्या से देश का उद्योग काफी प्रभावित है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इससे निपटने के लिए वित्त मंत्रालय को आदेश दिया है कि वह पेपको को तेल खरीदने के लिए तत्काल धन दे। पूर्व में भी प्रधानमंत्री रहे यूसुफ रजा गिलानी ने भी बिजली की कमी को स्वीकार करते हुए विद्युत उत्पादन बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं पर काम होने की बात कही थी। बिजली उत्पादन में कमी के चलते लोडशेडिंग की अवधि शहरों में 10 से 12 घंटे तथा ग्रामीण अंचलों में 16 घंटे की गई है।
एसी-मोजे पर लगी पाबंदी
पाकिस्तान सरकार ने बिजली संकट से उबरने के लिए सरकारी दफ्तरों में एसी चलाने पर पाबंदी लगाने के साथ ही सरकारी कर्मचारियों पर मोजे पहनकर कार्यालय आने पर भी पाबंदी लगा दी है। पाक सरकार ने गत सप्ताह ही इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया था। सरकार ने इसमें कहा था कि अगले सप्ताह से सभी सरकारी दफ्तरों में एसी नहीं चलेगी। कर्मचारी निर्धारित ड्रेस कोड में ही कार्यालय आएंगे। ड्रेस कोड में कर्मचारियों को हल्के रंग या सफेद रंग की शर्ट, हल्के रंग की पैंट या सलवार कमीज पहनकर दफ्तर आना होगा। कर्मचारी अब सिर्फ बिना फीते वाले जूते या सैंडल पहनकर दफ्तर आएंगे, लेकिन इसके साथ मोजा नहीं पहनना होगा। सरकार का तर्क है कि मोजे और फीते वाले जूते से गर्मी ज्यादा लगती है। इस नये कोड की तैयारी के लिए सात दिन का समय दिया है। इसके बाद सभी कर्मचारियों को नए ड्रेस कोड में ही दफ्तर आना होगा। यह भी हकीकत है कि आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान ने कभी इस समस्या को गंभीरता से लिया ही नहीं है। आतंकवाद समेत तमाम समस्याओं के चलते किसी राजनीतिज्ञ ने भी इस ओर विशेष ध्यान नहीं दिया। अगर दिया भी गया, तो वहां की राजनीति में पिछले बरसों में हुए उलटफेर में उसकी सारी रणनीति धरी की धरी रह गई। वर्तमान में पाकिस्तान के पास जो बिजली उत्पादन इकाइयां हैं, वह 60 के दशक की हैं, जो अब धीरे-धीरे क्षमताहीन हो गई हैं। पूरे पाकिस्तान की बात कौन करे, यहां तक कि पाक की राजधानी इस्लामाबाद में ही कई-कई घंटे बिजली गुल रहती है। पाकिस्तान में बिजली आपूर्ति का संकट इतना अधिक गहराया है कि यहां के दूसरे सबसे बडे और व्यस्त शहर लाहौर में भी 12 से 13 घंटे तक बिजली नहीं रहती है। पेशावर में हर दिन 14 घंटे बिजली नहीं रहती और फैसलाबाद तथा गुजरांवाला में 20 घंटे तक बिजली गुल रहती है। बिजली आपूर्ति के संकट से सबसे अधिक पंजाब प्रांत जूझ रहा है और उत्तरी कबायली इलाकों में तो मात्र चार-पांच घंटे ही बिजली रहती है।
दो साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट
वर्ल्ड बैंक के अधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान और भारत के बीच बिजली खरीदने की डील अगले दो साल में पूरी हो जाएगी। इसमें फिजिबिलिटी सर्वे, कीमत का निर्धारण, ट्रांसमिशन लाइन तैयार करने की प्रक्रिया भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि, दोनों के बीच इसके लिए कोई मैकेनिज्म फिलहाल विकसित नहीं है। हालांकि इन सबके बीच यह भी सही है कि पिछली पाक सरकार ने बीते साल भारत से 500 मेगावॉट बिजली इंपोर्ट किए जाने पर सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दी थी। दोनों देशों के जानकारों के बीच इस्लामाबाद में हुई मीटिंग में एक हाई वोल्टेज डायरेक्ट करेंट लिंक तैयार करने पर भी चर्चा हुई थी। भारतीय अधिकारियों ने उन जगहों का दौरा भी किया था, जहां इलेक्ट्रिक ग्रिड का निर्माण किया जाना था, लेकिन बाद में इस दिशा में कोई उल्लेखनीय कदम नहीं उठाया गया।













