श्री गणेशाय नमः

श्री गणेशाय नमः
श्री गणेशाय नमः

Saturday, January 25, 2014

वाकई ! गालियों की भाषा समझती है सरकार



PKG_DND_GALI KI BHASHA_VIKRAM_ANISH

एंकरबहुगुणा सरकार विकास के लाख दावे करे...लेकिन ये कितना सही है...इसे इसी बात से समझा जा सकता है, कि सरकार के 'अपने' ही उसे झुठलाने लगे हैं...हम बात कर रहे हैं विधानसभा उपाध्यक्ष अनसूया प्रसाद मैखुरी की...उन्होंने बयान दिया, कि सरकार केवल गालियों की भाषा ही समझती है...48 घंटे के भीतर बयान का असर दिखा...और सरकार ने एक साल से लटके डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को न सिर्फ स्वीकृति दी...बल्कि 25 करोड़ रुपये भी रिलीज कर दिए...

लोकेशनदेहरादून

स्लग
अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने अपनाया बगावती तेवर
बयान के 48 घंटे में डीपीआर को मिली स्वीकृति
शासन ने 25 करोड़ रुपये भी किए रिलीज

वीओ1जब बात विकास की हो...और सरकार केवल थोथे दावे करती हो...तो संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि आखिर चुप भी रहें तो कब तक ?...दो दिन पहले उत्तराखंड विधानसभा उपाध्यक्ष अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने सरकार से नाराज़गी दिखाई...उनकी नाराज़गी की प्रमुख वजह थी, कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के गैरसैण में विधानसभा भवन बनाने में सरकारी टाल-मटोल... भवन की बात कौन करे...उसका डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट ही स्वीकृत नहीं हुई थी...लेकिन जब अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने बगावती तेवर अपनाया...तो उनके बयान के 48 घंटे के भीतर ही सरकार ने एक साल से लटके इस डीपीआर को स्वीकृति दे दी गई... इतना ही नहीं...शासन ने 25 करोड़ रुपये भी रिलीज कर दिये

बाइटसुभाष कुमार, मुख्य सचिव

वीओ—2— अब हम आपको दिखाते हैं, मैखुरी का वो बयान, जिसके बाद सूबे की सरकार हरकत में आई...

बाइटअनुसूया प्रसाद मैखुरी, उपाध्यक्ष,विधानसभा

वीओ3खैर, इस जुबानी जंग के बीच विपक्ष को मानो बैठेबिठाये सियासी रंग जमाने का एक मुद्दा मिल गया....वो अनुसूया प्रसाद मैखुरी के बहाने सरकार पर निशाना साध रही है...

बाइटप्रकाश सुमन ध्यानी, भाजपा प्रवक्ता
बाइटअजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष

क्लोजिंग एंकरसवाल बड़ा है, कि क्या इसे वाकई प्रदेश सरकार केवल गालियों की भाषा ही समझती है...पहले वादा...फिर अपनों का विरोध और उसके बाद डीपीआर की स्वीकृति...इन सबके बीच सरकार की काफी फजीहत भी हुई...
साधना न्यूज के लिए देहरादून से विक्रम श्रीवास्तव की रिपोर्ट...

सुनंदा की प्रेम कहानी का दुखद अंत



PKG_THAROOR-SUNANDA_ANISH

एंकरकेंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्‍नी सुनंदा पुष्‍कर की संदिग्‍ध परिस्थितियों में मौत हो गई है...शुक्रवार को दक्षिणी दिल्ली के होटल 'लीला' के कमरा नंबर 345 में सुनंदा का शव मिला...आशंका जताई जा रही है कि सुनंदा ने खुदकुशी की है...सुनंदा की मौत की खबर ऐसे समय आई जब शशि थरूर के पाकिस्‍तानी पत्रकार मेहर तरार के कथित अफेयर की चर्चा गर्म थी...आइए, आपको बताते हैं कि आखिर शशिसुनंदा का ये प्यार किस कदर परवान चढ़ा और आखिर कैसे और क्यों इस प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत हुआ

ग्राफिक्स... GFX_THAROOR-SUNANDA_ANISH
शशि थरूरसुनंदा पुष्‍कर की शादी 22 अगस्‍त 2010 को केरल में पारंपरिक मलयाली रीति-रिवाज से हुई थी.
शशि थरूर की यह सुनंदा से तीसरी शादी थी, सुनंदा की भी इससे पहले दो शादियां हो चुकी थीं.
शशि की पहली पत्‍नी का नाम तिलोत्‍तमा मुखर्जी था, जबकि दूसरी शादी कनाडा की क्रिस्टा जाइल्स से हुई थी
मूल रूप से कश्मीर के सोपोर जिले की रहने वाली सुनंदा पुष्कर के पिता सेना में अफसर रह चुके हैं.
सुनंदा कश्मीर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट थी.
सुनंदा की पहली शादी कश्‍मीरी पंडित संजय रैना से हुई थी, जो असफल रही.
—90 के दशक में सुनंदा अपने दोस्‍त सुजीत मेनन संग दुबई गई और बाद में दोनों ने शादी कर ली.
हाल में पाकिस्‍तानी पत्रकार मेहर तरार से शशि थरूर के कथित अफेयर की चर्चा गर्म थी.
मेहर तरार पाकिस्‍तान के लाहौर में रहती हैं और वह स्‍वतंत्र पत्रकार हैं. वह डेली टाइम्‍स में भी काम कर चुकी हैं.
मेहर तरार ने माना है कि वह थरूर से दो बार मिल चुकी हैं. थरूर से मेहर तरार की पहली मुलाकात भारत में हुई और दूसरी बार वे दुबई में मिले.
सुनंदा 2005 से टीकॉम इंवेस्‍टमेंट कंपनी में बतौर सेल्‍स मैनेजर थीं और वह दुबई की हाई प्रोफाइल पार्टियों में भी दिखती थी.
सुनंदा दुबई में बतौर ब्यूटीशियन भी पहचानी जाती थी.
शशि थरूर और सुनंदा पुष्कर पहली बार 2008 में दिल्ली में इंपीरियल में अवार्ड समारोह में मिले थे.
एक साल तक चली दोस्‍ती में शशि और सुनंदा केवल 3 बार मिले.
थरूर ने सबसे पहले सुनंदा को अपने सरकारी बंगले में प्रपोज किया, जबकि साल 2010 में कसौली में थरूर ने सुनंदा के सामने शादी का प्रस्‍ताव रखा.
शादी के बाद सुनंदा पहली बार तब विवादों में आईं, जब आईपीएल विवाद में शशि थरूर ने सुनंदा के बैंक खाते में 50 लाख रुपये ट्रांसफर किए.
शशि थरूर के निजी सचिव ने पत्रकारों से बातचीत में सुनंदा के मौत की खबर बताई.
बताया जा रहा है कि सुनंदा और शशि थरूर दोनों ही होटल लीला में ठहरे थे.
सुनंदा ने शशि थरूर के साथ गुरुवार सुबह को ही होटल में चेक-इन किया था. घर में कोई काम चल रहा था इसलिए सुनंदा होटल में आ गई थीं.
कमरा नंबर 345 के साथ कमरा नंबर 342 भी बुक कराया गया था.

क्लोजिंगशशि थरुर और सुनंदा की प्रेम कहानी के इस दुखद अंत का किसी को अहसास तक नहीं था... पुलिस ने होटल लॉबी की सीसीटीवी फुटेज कब्जे में ले लिया है और अब शशि थरूर से भी पूछताछ की जा रही है...सुनंदा पुष्‍कर की मौत की खबर आते ही लोग सन्‍न रह गए...सोशल मीडिया पर सुनंदा की मौत की खबर सुर्खियों में है...ये खबर सुनकर पाकिस्‍तानी पत्रकार मेहर तरार ने भी ट्विटर के जरिये प्रतिक्रिया दी और लिखा 'ओह माई गॉड'.
ब्यूरो रिपोर्ट साधना न्यूज...

उपेक्षा का शिकार विदुर आश्रम



PKG_BIJNOR_VIDUR KUTIYA_ANISH

एंकरआपने टीवी पर महाभारत सीरियल को जरुर देखा होगा...फिर तो आपको कृष्ण,विदुर का वह सीन भी याद होगा...जिसमें श्रीकृष्ण ने दुर्योधन का 56 भोग ठुकराकर...विदुर के यहां बथुए का साग खाया था...जी हां...इन्हीं विदुर जी का मंदिर वर्तमान में बिजनौर जिले में स्थित है...जो सरकार की उपेक्षा से इन दिनों बदहाली से जूझ रहा है...देखिये साधना न्यूज की ये रिपोर्ट...

वीओ—1—कभी आर्यावर्त कहे जाने वाले भारत की पगपग की भूमि में अध्यात्म बसता है...उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में महाभारतकालीन अवशेषों की भरमार है...यहां स्थित है महात्मा विदुर का आश्रम, जो आज मंदिर का स्वरुप ले चुका है...इस मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है...किंवदं​तियों की मानें तो जब विदुर के पांडवों को राज्य लौटाने की सलाह मानने से धृतराष्ट्र ने इंकार कर दिया, तो इसे अपमान मानकर विदुर हस्तिनापुर से सीधे बिजनौर गंगा तट पर पहुंचे और तपस्या शुरू कर दी...इनकी तपस्या से श्रीकृष्ण खुश हुए और दुर्योधन का 56 भोग ठुकराकर भक्त विदुर के यहां बथुए का साग खाया...आज जहां विदुर की कुटी थी...वहां विशाल मंदिर बन चुका है

बाइटराजकुमार कौशिक,पुजारी

वीओ—2—महाभारतकालीन इस विदुर कुटी मंदिर का उद्घाटन देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 1962 में किया था...आज भी यहां दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं...साल 2005 में तत्कालीन सपा सरकार ने इसे पर्यटन स्थल घोषित तो किया...लेकिन सरकार की उपेक्षा के चलते आज तक यहां कोई विकास कार्य नहीं हो सका

बाइटअशोक निर्दोष, क्षेत्रवासी

वीओ—3—विदुर के इस पवित्र मंदिर के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु हर साल आते हैं और यहां से बथुए का साग ले जाना वह नहीं भूलते

बाइटश्रद्धालु

क्लोजिंग एंकरविदुर आश्रम का दीदार करने के लिए यहां दूरदराज से श्रद्धालु आते तो हैं, लेकिन यहां सरकार की ओर से कोई मुकम्मल व्यवस्था न होने से काफी दिक्कतों का सामना करते हैं...सरकार के पर्यटन स्थल घोषित करने के बावजूद अगर यहां बेहतर व्यवस्था की जाती, तो शायद यहां न सिर्फ सरकार को बेहतर राजस्व मिलता...बल्कि इसकी ख्याति भी देश के साथ ही विदेशों तक पहुंच गई होती

लोकेशनबिजनौर


श्रीकृष्ण ने खाया था बथुए का साग
साल भर दूरदराज से आते श्रद्धालु
सरकार को मिल सकता काफी राजस्व