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BHASHA_VIKRAM_ANISH
एंकर—बहुगुणा सरकार विकास के लाख दावे करे...लेकिन ये कितना सही है...इसे इसी बात से समझा जा सकता है, कि सरकार के 'अपने' ही उसे झुठलाने लगे हैं...हम बात कर रहे
हैं विधानसभा उपाध्यक्ष अनसूया प्रसाद मैखुरी की...उन्होंने बयान दिया, कि सरकार
केवल गालियों की भाषा ही समझती है...48 घंटे के भीतर बयान का असर दिखा...और सरकार
ने एक साल से लटके डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को न सिर्फ स्वीकृति
दी...बल्कि 25 करोड़ रुपये भी रिलीज कर दिए...
लोकेशन—देहरादून
स्लग—
अनुसूया
प्रसाद मैखुरी ने अपनाया बगावती तेवर
बयान
के 48 घंटे में डीपीआर को मिली स्वीकृति
शासन
ने 25 करोड़ रुपये भी किए रिलीज
वीओ—1— जब बात विकास की
हो...और सरकार केवल थोथे दावे करती हो...तो संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि आखिर
चुप भी रहें तो कब तक ?...दो दिन पहले उत्तराखंड विधानसभा उपाध्यक्ष
अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने सरकार से नाराज़गी दिखाई...उनकी नाराज़गी की प्रमुख वजह
थी, कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के गैरसैण में विधानसभा भवन बनाने में सरकारी
टाल-मटोल... भवन की बात कौन करे...उसका डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट ही
स्वीकृत नहीं हुई थी...लेकिन जब अनुसूया प्रसाद मैखुरी ने बगावती तेवर अपनाया...तो
उनके बयान के 48 घंटे के भीतर ही सरकार ने एक साल से लटके इस डीपीआर को स्वीकृति
दे दी गई... इतना ही नहीं...शासन ने 25 करोड़ रुपये भी रिलीज कर दिये
बाइट—सुभाष कुमार, मुख्य सचिव
वीओ—2— अब हम आपको दिखाते हैं, मैखुरी का वो
बयान, जिसके बाद सूबे की सरकार हरकत में आई...
बाइट—अनुसूया प्रसाद मैखुरी, उपाध्यक्ष,विधानसभा
वीओ—3—खैर, इस जुबानी जंग के बीच विपक्ष को मानो बैठे—बिठाये सियासी रंग
जमाने का एक मुद्दा मिल गया....वो अनुसूया प्रसाद मैखुरी के बहाने सरकार पर निशाना
साध रही है...
बाइट—प्रकाश सुमन ध्यानी, भाजपा प्रवक्ता
बाइट—अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष
क्लोजिंग एंकर—सवाल बड़ा है, कि क्या इसे वाकई प्रदेश सरकार केवल गालियों
की भाषा ही समझती है...पहले वादा...फिर अपनों का विरोध और उसके बाद डीपीआर की
स्वीकृति...इन सबके बीच सरकार की काफी फजीहत भी हुई...
साधना न्यूज के लिए देहरादून से विक्रम श्रीवास्तव की रिपोर्ट...
