श्री गणेशाय नमः

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Saturday, March 8, 2014

संकट में बीजेपी की'काशी'

अनीश कुमार उपाध्याय,दिल्ली
काशी नगरी भी अजीब है.ये ना सिर्फ विश्व की धार्मिक धरोहर है, बल्कि इतिहास की तमाम गाथाओं को अपने में समेटे हुये है.राजा हरिश्चंद्र को खरीदकर यहां के डोम ने जहां ख्याति पाई.वहीं मणिकर्णिका घाट पर स्थित सती की पीठ भक्तों को सहज ही अपनी ​ओर खींचती है.यही नहीं यहां के वाशिंदे अपने बनारसी अंदाज को लेकर समूचे विश्व में एक अलग ही पहचान रखते हैं.वहीं अब राजनीति के मामले में भी काशी नगरी एक नई इबारत लिखने की तैयारी में है.देश की राजधानी दिल्ली हो या राज्य की राजधानी लखनऊ.इससे कोसों दूर बसी इस काशी नगरी में अबकी बीजेपी के दिग्गजों की खींचतान को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हैं.
दरअसल बीजेपी यहां से अपने पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को चुनाव लड़ाना चाहती है.उसकी सोच भी गलत नहीं है.इन दिनों बीजेपी का बेड़ा पार करने का दमखम केवल नरेंद्र मोदी के पास ही वो देख रही है.ऐसे में मोदी को इस सीट से चुनाव लड़ाना लाजिमी है, जहां से वो रिकार्डतोड़ वोट से जीत दर्ज कर सकें.ऐसे में मौजूदा दौर में वाराणसी सीट बीजेपी को सटीक दिख रही है.इसके लिए बीजेपी दिग्गजों ने कमर भी कस ली है.हालांकि अब इसमें पेंच भी फंस गया है और इसे किसी विपक्षी ने नहीं, बल्कि बीजेपी के अपने और राजनीतिक दिग्गज कहे जाने वाले डॉ.मुरली मनोहर जोशी ही ताल ठोककर सामने आ चुके हैं.भाजपा यहां से अपने पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर दांव इसलिए भी खेलना चाहती है, क्योंकि हर विपक्षी पार्टी हर हाल में मोदी के विजयरथ को रोकने की फिराक में है.वहीं भाजपा एक बार फिर मोदी को काशी से चुनावी मैदान में उतारकर अपने पुराने नारे अयोध्या, मथुरा, काशी के जरिये अघोषित हिंदुत्व को धार देना चाहती है.भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी यहां का प्रतिनिधित्व संसद में करते हैं.
 
हालांकि बीजेपी का अंर्तकलह अब खुलकर सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है.या यूं कहें कि मोदी और जोशी को लेकर यहां पोस्टर वार छिड़ चुका है.एक ओर जहां डॉ.मुरली मनोहर जोशी के समर्थक ‘बोले काशी विश्वनाथ, डॉ. जोशी का देंगे साथ‘ के जरिये जोशी का जोरदार समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मोदी समर्थक‘काशी नगरी करे पुकार-नरेंद्र मोदी अबकी बार‘ के जरिये मोदी को ही यहां से चुनाव लड़ाने की हुंकार भर रहे हैं.अब तो कहा यहां तक जा रहा है कि जोशी ने हाईकमान को सख्त लहजे में चेतावनी भी दे डाली है कि वो आडवाणी नहीं है, जो चुप बैठ जाएंगे.वो तो अंत तक संघर्ष करते रहेंगे.मतलब साफ है कि अगर जोशी को वाराणसी सीट से हटाने की कोशिश हुई, तो बीजेपी में यहां दो गुट होते देर नहीं लगेगी और कुल मिलाकर घाटा बीजेपी को ही होगा.अगर जोशी ने जिद नहीं छोड़ी, तो ना सिर्फ बीजेपी का राजनीतिक गणित गुड़—गोबर होगा, बल्कि इसका असर समूचे देश में देखा जाएगा.

वैसे अभी चर्चाओं में ये भी है कि इस मसले पर बीजेपी के दिग्गजों के माथे पर पसीना चुहचुहा आया है.अब वो ये तय नहीं कर पा रहे कि वो मोदी का साथ दे, जिसके दमखम पर वो अगला चुनाव लड़ने जा रहे हैं. या डॉ.मुरली मनोहर जोशी का जो पार्टी के पुराने दिग्गजों में से एक हैं.वाराणसी से वो सांसद भी हैं.अगर वो किसी को भी नजरंदाज करते हैं तो एक तबके की नाराजगी तय है.अब बीजेपी को ये तय करना है कि वो मोदी समर्थकों को नाराज करती है, या जोशी समर्थको को.हालांकि हर हाल में इसका फायदा विपक्षी पार्टी को ही मिलना तय है.