श्री गणेशाय नमः

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Friday, January 25, 2019

‘फेसबुकिया आतंकवाद’

-कश्मीरी युवती का आतंकी कनेक्शन
आतंकवाद किसी भी रूप में घातक होता है। वह परोक्ष हो या प्रत्यक्ष। आधुनिक युग में सोशल साइट्स भी आतंकवाद फैलाने का एक अहम जरिया बन रही हैं। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की ओर से पकड़ी गई महिला ने जो खुलासा किया हैवह वाकई ​चिंता का विषय है। वैसे भी घाटी में भटके युवाओं की कमी नहीं है और ये महिला फेसबुक के जरिए युवाओं को आतंकवाद खास तौर पर जैश-ए-मोहम्मद जैसे घातक आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए उकसाती थी।
 30 साल की ये महिला शाजिया दो बच्चों की मां है और उत्तर कश्मीर के बांदीपोरा इलाके के संबल क्षेत्र की रहने वाली है। उसके आतंकी गतिविधियों की भनक खुफिया एजेंसियों को लगी और उसे दबोच लिया गया। इसमें खुलासा हुआ है कि फेसबुक से ही संपर्क में आए अनंतनाग के दो युवाओं को उसने कुछ शस्त्र और गोला-बारूद भी दिए थे। इससे दीगर अगर बात केवल सोशल साइट्स की करेंतो नि:संदेह आधुनिक दौर में इंटरनेट ने आज दुनिया को मुठ्ठी में कर लिया है। हालांकि इसका दूसरा पक्ष स्याह है। इसी स्याह पक्ष का जिहादी आतंकी गतिविधियों में कर रहे हैं। आजकल शायद ही कोई युवा होगाजिसके हाथ में मोबाइल और इंटरनेट न हो। ऐसे में अगर इसे आतंकवाद का माध्यम बनाया जा रहा हैतो नि:संदेश यह चिंता वाली बात है।
 सोशल साइट्स के दुरुपयोग की खबरें अक्सर समाचार पत्रों में आती रही हैंलेकिन अबकी जो खुलासा हुआ हैउसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। मौजूदा दौर में कश्मीर भटके युवाओं की शरणस्थली के रूप में विकसित होता जा रहा है। अगर जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन इसी सोशल मीडिया को अपना हथियार बना रहे हैंतो उनके दूर-दूराज के क्षेत्रों तक पकड़ बनाने में कहीं मुश्किल नहीं होगी। सरकार और विपक्ष को भी सारे गिले-शिकवे भुलाकर इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।



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