मतदान के बाद ही हार के बहाने की तलाश
लगता है कि मध्य प्रदेश में मतदान के दौरान ही कांग्रेस को आभास हो चुका है कि वह चुनाव हार रही है। यहां मतदान के दौरान जिस तरह कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया और ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने की कोशिश की, उससे उनकी हताशा झलकती दिखी। यही नहीं, जिस कमलनाथ समेत समूची कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव के दौरान ‘कमल’ चिह्न दिखाने का विरोध किया था और हंगामा खड़ा किया था, वही गलती अबकी खुद कमलनाथ ने ही मतदान के बाद बाहर निकलकर ‘हाथ का पंजा’ दिखाकर कर दी है।
ईवीएम के मत्थे आरोप मढ़ना विपक्ष के लिए कोई नई बात नहीं है। अब ईवीएम का रोना रोने वालों में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह भी शामिल हो गए हैं। मतदान के दौरान उन्होंने ट्वीट करते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस के पक्ष के कई मतदान केंद्रों से ईवीएम खराब होने की सूचनाएं आ रही हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा मुखिया मायावती, दिल्ली के मुख्यमंत्री और ‘आप’ मुखिया अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी सरीखे अनेक विपक्षी नेता भी ऐसे ही आरोप अक्सर लगाते रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि चुनाव आयोग इस पर फौरन निर्णय लेते हुए मशीनों को बदले। हालांकि दिग्विजय के आरोप पर मप्र के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस का विकास से कोई नाता नहीं है, इसलिए जनता उसे इस बार भी नकार देगी और वे इसीलिए बहाने तलाश रही है।
अबकी कमलनाथ ने वह गलती भी दोहरा दी है, जिसे लेकर वे खुद और समूची कांग्रेस कभी भाजपा पर हमलावर थी। दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में मतदान के बाद ‘कमल’ का चिन्ह दिखाने को लेकर जो कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी की उम्मीदवारी खत्म करने की पैराकारी कर रही थी, अब वही गलती मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कमलनाथ ने भी शिकारपुर गांव में मतदान के दौरान कर दी। जब वे पोलिंग बूथ से बाहर निकले, तो उन्होंने स्याही लगी उंगली के साथ पंजा भी दिखाया। यह कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिन्ह है। इससे विवाद पैदा हो गया है। भाजपा ने इसके लिए कमलनाथ पर एफआईआर की मांग की है। खंडवा से भाजपा सांसद नंदकुमार सिंह ने कहा कि इस मसले पर चुनाव आयोग को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। लोकतंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए। इस पर कमलनाथ ने जवाब दिया कि वे अपना वोट पहले ही डाल चुके थे और जब मीडिया ने पूछा कि वोट किसे दिया, तो ‘पंजा’ दिखा दिया। इसके अलावा मैं क्या करता? क्या उन्हें कमल दिखाता?
हो सकता है कि कमलनाथ का तर्क सही हो, लेकिन तब वे और समूची कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यही तर्क क्यों नहीं मान रही थी? जब मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान गांधीनगर में वोट डालने के बाद कमल निशान दिखाया था, तो चुनाव आयोग से शिकायत क्यों की गई थी? इसी शिकायत पर तो गुजरात के मुख्य सचिव और डीजीपी को मोदी पर कार्रवाई करने का आदेश देना पड़ गया था। इससे भी कांग्रेस तब संतुष्ट नहीं हुई और उसने वडोदरा से वाराणसी में नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी को खारिज करने की मांग की थी। ये मौजूदा घटनाक्रम इतना बताने के लिए काफी है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच लगता है कि जैसे मायूस कांग्रेसी नेता अभी से ही हार के बहाने तलाशने लगे हैं। उन्हें ये पूरा भरोसा हो चुका है कि अबकी भी कांग्रेस मध्य प्रदेश में कोई कमाल दिखाने नहीं जा रही है, ऐसे में जनता के बीच बने रहने का कोई और बड़ा मुद्दा फिलहाल नहीं हो सकता है।
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