आम चुनाव से पहले बने राम मंदिर
हिंदुओं के लिए राम मंदिर न सिर्फ आस्था का मुद्दा है, बल्कि अयोध्या वह पावन धरती है, जहां महामानव राम ने अवतार लिया। वास्तव में देश के अधिकांश हिंदू चाहते हैं कि अयोध्या में राम का भव्य मंदिर बने। भाजपा और आरएसएस के लिए भी राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा है। हालांकि अभी भी बहुत हिंदू सांप्रदायिक होने के नाम पर राम मंदिर के पक्ष में खुले तौर पर पक्ष में नहीं है। विपक्ष की राजनीति में भी राम मंदिर का मतलब आरएसएस और भाजपा ही रहा है।
इस बात को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी बखूबी जानते हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर से हर हिंदू को राम मंदिर के लिए उठ खड़े होने का आह्वान किया है। भागवत अरसे से राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्षरत हैं और उनके भाषणों मेें भी यह मुद्दा प्रमुख रूप से रहता है। वाराणसी के कोइराजपुर में 250 प्रचारकों के संबोधन में भागवत का कहना था कि अगर आप रामचरित मानस को मानते हैं, तो राम को क्यों नहीं मान सकते? अगर राम को मानते हैं, तो फिर राम मंदिर का विरोध क्यों? इसके लिए तो सभी हिंदू को उठ खड़े हों। भागवत स्पष्ट रूप से चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले ही राम मंदिर बने। आगे आने वाले चुनाव में हो सकता है कि विपक्ष राम मंदिर को ही अपना प्रमुख मुद्दा बनाए। अगर इससे पहले ही मंदिर का निर्माण हो जाएगा, तो विपक्ष के पास कम से कम भाजपा के विरोध करने के लिए यह मुद्दा तो नहीं ही होगा। खैर, भागवत अपने एजेंडे को लेकर हर हिंदू को जागरूक करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बने और वह भी जल्द।
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