-खुलेंगे और मेडिकल कॉलेज
भारतीय संविधान ने अपने नागरिकों को जो अधिकार दिए हैं, उनमें शिक्षा और स्वास्थ्य का अधिकार प्रमुख है, लेकिन उत्तर प्रदेश की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसी है, जिसमें कोई भी नागरिक यह नहीं कह सकता है कि उसे सरकारी स्तर पर सस्ती और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलती है। कुछ खास धनाढ्य और क्षमतावान वर्ग की बात छोड़ दें, तो अमूमन आम आदमी किसी भी गंभीर बीमारी के होने पर अपना इलाज कराने के बजाय मौत को गले लगाना ज्यादा सस्ता समझता है।
यह सही है कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन अभी भी बहुत कार्य किया जाना बाकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में करीब 20 प्रतिशत चिकित्सकों की कमी है। सीएचसी में 84 फीसदी विशेषज्ञ नहीं है। शिशु मृत्यु दर पूरे देश में नीचे से तीसरे स्थान पर है। करीब साढ़े 19 हजार लोगों पर सिर्फ एक डॉक्टर है। साढ़े तीन हजार लोगों पर एक बेड है, जबकि सरकारी मानकों में यह संख्या प्रति एक हजार व्यक्तियों पर दो बेड होनी चाहिए।
अब जब सूबे के चिकित्सा शिक्षामंत्री आशुतोष टंडन ने प्रदेश में 13 मेडिकल कॉलेजों को खोले जाने की घोषणा की है, तो इससे ये उम्मीद जरूर बंधी है कि कुछ वर्षों में हो सकता है कि यहां की तस्वीर कुछ बदले। इसमें तीन साल में दो से चार हजार एमबीबीएस सीटों को बढ़ाने की भी घोषणा हुई है। इसका मतलब यह है कि कुछ वर्षों बाद यहां हर साल करीब चार हजार डॉक्टर निकलेंगे और हो सकता है कि इसमें से अधिकांश सूबे की जनता की चिकित्सा सेवा में अपना योगदान दें। कम से कम मेडिकल कॉलेज ज्यादा होंगे, तो अव्वल तो जनहानि रोकने में मदद मिलेगी। दूसरे, प्रदेश के बच्चों का भविष्य भी उज्जवल होगा।
वास्तव में करीब 20 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में सबको स्वास्थ्य सेवा देना गंभीर चुनौती है। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार चूंकि खुद उस संसदीय क्षेत्र से आते हैं, जहां जापानी इंसेफलाइटिस जैसी जानलेवा बीमारी बच्चों की जिंदगी निगल रही है। वे इस पीड़ा को न सिर्फ बखूबी जानते हैं, बल्कि इसे दूर करने के लिए प्रयासरत भी रहे हैं। अब जब उत्तर प्रदेश में वे ही सरकार के मुखिया हैं, तो इस स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार का भी सारा दारोमदार भी उन पर ही है। वे भी जानते हैं कि बिना मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के चिकित्सकों की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता। अब जब प्रदेश सरकार इसको लेकर सक्रिय दिख रही है, तो ये उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले वर्षों में सूबे की स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी। अगर ऐसा संभव हो सका, तो ये योगी आदित्यनाथ सरकार की बड़ी उपलब्धि होगी।
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