— सब्सिडी पर दिए जा रहे एक लाख सौर ऊर्जा कृषि जल पंप
चालू खरीफ में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण महाराष्ट्रह में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य के मुख्य मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यष की 180 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र है। ऐसे में सूखे महाराष्ट्र को उबारने के लिए सौर ऊर्जा को तारणहार बनाने की कवायद में महाराष्ट्र सरकार जुटी है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी किसानो के हितों का ध्यान रखते हुए एक नई महत्वकांक्षी योजना का आधिकारिक ऐलान किया है। इसके अंतर्गत, किसानों को अत्यधिक सब्सिडी दरों पर एक लाख सौर ऊर्जा वाले कृषि पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार की यह योजना अटल सौर कृषि योजना के अंतर्गत है।
सरकार द्वारा शुरू की गयी इस योजना को संपूर्ण रूप से शुरू करने के लिए सरकार करीब 3,426 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य है। महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य किसानों को प्रोत्साहित करना और इस योजना के माध्यम से सब्सिडी पर राज्य के बोझ को कम करना है। इस योजना के तहत सौर पंप केंद्र सरकार की अटल सौर कृषि पंप योजना के आधार पर तैयार किए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य किसानों को प्रोत्साहित करना और इस योजना के माध्यम से सब्सिडी पर राज्य के बोझ को कम करना है। बताया जा रहा है कि एमईडीए गणना के मुताबिक, राज्य सरकार को बिजली की बिक्री पर करों पर 12 पैसे को सार्वभौमिक रूप से खपत की जा रही है।महाराष्ट्र सरकार कृषि और ग्रामीण विकास (नाबार्ड) के नेशनल बैंक से अल्पावधि कम ब्याज ऋण खरीदने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। इसके अलावा राज्य सरकार परियोजना और अंतराल-वित्त पोषण के कार्यान्वयन के लिए केंद्र की ऊर्जा दक्षता लिमिटेड (ईईएसएल) के साथ समझौता करने का विकल्प भी तलाश रही है। ईईएसएल को वार्षिक किश्तों के आधार पर अपनी सेवाओं के लिए भुगतान किया जा सकता है। इस योजना के संचालन के लिए सरकार द्वारा करीबन 434 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें से सामान्य बजट (67 करोड़ रुपए), जनजातीय उप-योजना (150 करोड़ रुपए) और एससी / एसटी उप-योजना (217 करोड़ रुपए) से बजटित धन का उपयोग शामिल है।
बता दें कि चालू खरीफ में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। राज्य के मुख्यिमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्यभ की 180 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र है। इससे पहले मानसूनी बारिश कम होने के कारण बिहार और गुजरात भी अपने यहां कई जिलों को सूखा घोषित कर चुके है। सूखे से निपटने के लिए राज्यत सरकार कई अन्य योजनाओं को भी क्रियान्वित करने की तैयारी में है। महाराष्ट्र में बारिश में कमी, गन्ने की खेती और सिंचाई के लिए बड़ी मात्रा में पानी के इस्तेमाल के कारण मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के 17 जिलों में सूखे की स्थिति बन गई है। जल संसाधन विभाग की ओर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र के अधिकतर हिस्सों में इस मॉनसून के दौरान औसत से कम बारिश हुई है और क्षेत्र में जल भंडार केवल 28.81 फीसदी है। मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए जीवन रेखा के रूप में प्रसिद्ध जयकवाड़ी बांध में पानी कम हो गया है। जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक कम से कम 17 जिलों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। वहीं गन्ने की खेती के लिए बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। प्रदेश के बीड़ जिले में स्थित महाराजा बांध में पिछले साल पर्याप्त पानी था, लेकिन वर्तमान समय में यह सूख गया है, क्योंकि गन्ने की खेती में बड़ी मात्रा में इसके पानी का इस्तेमाल किया गया है। मराठवाड़ा क्षेत्र में स्थित नौ बांध में से दो सूख चुके हैं और दूसरे बांध में औसतन 28.81 प्रतिशत जल का भंडारण ही है। पश्चिमी विदर्भ के अमरावती संभाग में औसत जल भंडारण 57.37 फीसदी है, जबकि पूर्वी विदर्भ के नागपुर संभाग में यह आंकड़ा 50 फीसदी से अधिक है। ऐसे में सौर ऊर्जा के उपयोग से खेती कार्य में आ रही बाधा को दूर कर खेतों को लहलहाया जा सकेगा।
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