मिलने लगी सफलता, शुरू हुई कार्रवाई
देश के सामने काला धन एक बड़ा मुद्दा है, साथ ही संवेदनशील भी। यह पहले से ही कहा जाता रहा है कि जितना काला धन विदेशों में है, अगर वह भारत में आ जाए तो देश का कायाकल्प हो जाए। तब भारत गरीब और विकासशील देश नहीं, बल्कि अमीर और विकसित देशों की कतार में खड़ा हो जाएगा। वैसे भी देश के लोग मानते हैं कि यह जनता के खून-पसीने की कमाई है, जिसे कुछ लोगों ने विदेशी बैंकों की तिजोरियों में जकड़ रखा है। उसे हर हाल में भारत लाया जाना चाहिए। इसीलिए जब पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को उठाया और कहा कि विदेशों में जमा कालाधन हर हाल में लाया जाएगा तो जनता ने उन्हें अपना समर्थन खुशी-खुशी दिया। पर तब नरेंद्र मोदी नहीं जानते थे कि यह काम इतना आसान नहीं है। इसमें मुश्किलें बहुत आएंगी और इन मुश्किलों को दूर करने में समय बहुत लगेगा।
सत्ता संभालते ही नरेंद्र मोदी ने काला धन के मुद्दे पर गंभीरता से कदम बढ़ाया। लेकिन समय तो लगना ही था। समय बीतने के साथ विपक्ष हमलावर हो गया। पूछने लगा कि कहां है काला धन ? उसके बार-बार पूछने से जनता में भी बेचैनी बढ़ने लगी। उसे भी लगा कि जैसे कांग्रेस उसे बार-बार धोखा देती रही, काला धन लाने की बात करती रही और विदेशों में जमा काला धन बढ़ता गया, उसी तरह से मोदी सरकार भी कर रही है। वह मानने लगी कि दोनों सरकारें एक जैसी हैं। काला धन कोई भी सरकार देश में नहीं लाना चाहती। इससे मोदी सरकार भी परेशान थी, लेकिन वह करे क्या ? जनता उसकी मंशा और कोशिशों को संदेह की नजर से देख रही थी। पर अब जाकर उसके कार्यों को सफलता मिलती दिख रही है। काला धन लाने के लिए उसने कई देशों से समझौता किया था ताकि काले धन की जानकारी उन देशों से भारत को मिल सके। अब जाकर उन देशों से कहीं सूचनाएं आने लगी हैं। कुछ देशों से सूचनाएं आने में अभी भी वक्त लगेगा। फिलहाल करीब 70 देशों से कालेधन के सुराग मिले हैं। विभाग को विदेशी लेनदेन से जुड़ीं करीब 30 हजार जानकारियां मिली हैं, जिनमें कई संदिग्ध हैं।
सरकार विदेशों से हुए वित्तीय लेनदेन का मिलान संबंधित लोगों के आयकर रिटर्न से कर रही है। इसमें एनआरआई और अरबों की संपत्ति के मालिक हाई नेटवर्थ इंडिवीजुअल यानि एचएनआई शामिल हैं। इनके रिटर्न और लेनदेन में तालमेल नहीं दिख रहा है। आयकर अधिकारियों ने ऐसे करीब 400 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। मतलब साफ है कि अब इनका कालाधन पकड़ा जाएगा। एक दिक्कत और है कि अपने देश में कोर्ट-कचहरी का चक्कर भी कुछ ज्यादा ही है। जो लोग पकड़े जाएंगे वे अपने बचाव के लिए कोर्ट की मदद जरूर लेंगे। और कोर्ट में कितना समय लगेगा, कोई नहीं बता सकता। इस तरह विदेशों में पकड़े गए काला धन को साबित करने और उसे जब्त करने की एक और लड़ाई देश में भी शुरू होनी है। पर ये बात जरूर है कि मोदी सरकार के नेक इरादों की झलक हमें जरूर मिलने लगी है और यह विश्वास भी पैदा हो रहा है कि अगर सरकार 2019 में भी आती है तो कालाधन जरूर पकड़ा जाएगा।
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