अभी तक कांग्रेस अपने आप को धर्मनिरपेक्ष पार्टी होने का झंडाबरदार मानती थी और भारतीय जनता पार्टी को सांप्रदायिक कहा करती थी। वह भाजपा को सांप्रदायिक इसलिए कहती थी कि वो हिंदुओं की बात करती थी, हिंदुओं के हितों के लिए खड़ी होती थी, राम मंदिर का मुद्दा उठाती थी और गायों की राजनीति करती थी। पर मध्य प्रदेश विधान सभा के चुनावों में पार्टी ने हिंदुत्व के मामले में भाजपा को भी पछाड़ दिया है। वह राम वन गमन मार्ग पर यात्राएं निकाल रही है और गौशालाएं बनवाने और गौ माता की रक्षा की बात कर रही है। राहुल गांधी के मंदिर-मंदिर घूमने का जो सिलसिला गुजरात चुनावों से शुरू हुआ था, वो कैलाश-मानसरोवर की यात्रा से होते हुए मध्य प्रदेश के मंदिरों तक जारी है। कांग्रेस की इन्हीं बातों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोरदार हमला बोला है। वे कहते हैं कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में गायों को बचाने की कसम खा रही है और तो केरल में गायों को काट कर खाने की बात करती है।
अब तक तो भाजपा और आरएसएस ही हिंदू समर्थक दल माने जाते थे, लेकिन अब लगता है कि कांग्रेस को भी सियासी सफलता के लिए हिंदुत्व अपनाने के अलावा और कोई चारा नहीं दिख रहा। यही कारण है कि मध्य प्रदेश विस चुनाव के घोषणापत्र में धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस मध्य प्रदेश में गाय, गोमूत्र और गौशाला की सियासत कर रही है। कांग्रेस की ये रणनीति कितना कारगर होगी, यह तो भविष्य बताएगा, पर इससे इतना तो साफ हो गया है कि कांग्रेस हर हाल में मध्य प्रदेश में सत्ता पाना चाहती है।
इसी घोषणापत्र को लेकर छिंदवाड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुटकी ली है कि कांग्रेस के नेता ‘कंफ्यूज’ और पार्टी ‘फ्यूज’ हो गई है। मध्य प्रदेश में गौमाता का गौरवगान कर रही है, तो केरल में खुलेआम कांग्रेस के लोग गाय का सिर काटकर मांस खाते हुए अपनी तस्वीर निकालकर कहते हैं कि गोमांस खाना हमारा अधिकार है। प्रधानमंत्री की बातों में दम है। अब तक भाजपा ही गोमूत्र, गोबर, गोशाला पर अपना एकाधिकार मानती आ रही है। ऐसे में अगर कांग्रेस भी उसी राह पर चल पड़ेगी, तो यह कहा ही जाएगा कि धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस अब पुरानी वाली कांग्रेस नहीं रही। वह भी अब हिंदुत्व के एजेंडे पर आगे बढ़ना चाहती है। वह अपनी रणनीति में बदलाव कर हिंदुओं में पैठ बनाना चाहती है। हालांकि उसे यह भी डर है कि कहीं इस कवायद से पार्टी के पुराने मतदाता नाराज न हो जाएं। ऐसे में वह हिंदुत्व तो अपनाना चाहती है, लेकिन सिर्फ मध्य प्रदेश में। केरल जैसे राज्यों में नहीं।
कांग्रेस, भाजपा के ‘गरम हिंदुत्व’ की बजाय ‘नरम हिंदुत्व’ का पक्षधर बनने की चाहत रखती है। करीब 125 साल पुरानी पार्टी, जिसे भारत में आधुनिक भाव बोध के अगुवा होने का अभिमान था, वह अब इसके सारे तकाजे को ताक पर रखने को तैयार है। इसका मतलब यही है कि अब वह मान चुकी है कि हिंदुओं को साथ लिए बगैर वह कोई भी चुनाव नहीं जीत सकती। कम से कम मध्य प्रदेश में तो बिल्कुल नहीं। केरल जैसे राज्यों को छोड़ दें, तो भाजपा का प्रमुख एजेंडा गौ संरक्षण ही रहा है और अब कांग्रेस भी इस राह पर आगे बढ़ रही है। असल में वर्ष 2014 से एक घबराहट-सी कांग्रेस पर तारी है। वह हर हाल में हिंदुओं को लुभाना चाहती है। कांग्रेस के सर्वोच्च नेता मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्षता का नाम लेना छोड़ दिया है। उसके नेता बार-बार कह रहे हैं कि वह ‘अच्छे हिंदुओं’ की पार्टी है। उसके नेता किताबें लिख रहे हैं कि वे क्यों ‘अच्छे हिंदू’ हैं और क्यों भाजपा के लोग ‘अच्छे हिंदू’ नहीं हैं। क्या इस देश में अब बहस सिर्फ ‘अच्छे हिंदू’ और ‘बुरे हिंदू’ के बीच रह गई है? इसका जवाब मध्य प्रदेश में चुनाव परिणाम के रूप में सामने आएगा कि इस एजेंडे से कौन, कितना सफल रहा है?
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