सांसद निवेदिता माने ने छोड़ा साथ, बेटे के साथ शिवसेना में गईं
लगता है कि आजकल एनसीपी के सितारे गार्दिश में चल रहे हैं और हालात ऐसे बन रहे हैं कि इस पार्टी के कई सिपहसालार साथ छोड़कर कांग्रेस समेत अन्य दलों का दामन थामने को बेचैन हों। जिस एनसीपी ने महाराष्ट्र की तीन-तीन बार कमान संभाली, आज वह बिखरती नजर आ रही है। एक प्रभावशाली नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष शरद पवार भी अपनी खिसकती सियासी जमीन को बचाने में लाचार दिख रहे हैं।
हालिया घटनाक्रम में एनसीपी की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद निवेदिता माने के पार्टी से इस्तीफा देना और मुंबई में उनके बेटे एवं जिला परिषद के सदस्य धैर्यशील पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल होना ये बता रहा है कि मामला गंभीर है। कहा तो ये जा रहा है कि माने ने यह निर्णय एनसीपी प्रमुख शरद पवार की किसान एवं हातकणंगले से स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के सांसद राजू शेट्टी से बढ़ती निकटता के कारण लिया है। इस संसदीय सीट से पहले माने सांसद हुआ करती थीं। वह पूर्व सांसद दिवंगत बालासाहेब माने की बहू हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में एनसीपी यह सीट शेट्टी के लिए छोड़ देगी। इस संसदीय सीट से माने, शेट्टी से दो बार चुनाव हार चुकी हैं। मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के निवास पर एक साधारण कार्यक्रम में ठाकरे और पार्टी के छह विधायकों की मौजूदगी में निवेदिता माने के पुत्र धैर्यशील शिवसेना में शामिल हुए। कहा जा रहा है कि वह आगामी लोकसभा चुनाव में हातकणंगले सीट से शेट्टी के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं।
हालांकि इससे पहले एनसीपी नेता और लोकसभा सांसद तारिक अनवर ने भी कुछ दिनों पहले ही पार्टी के साथ ही साथ सांसद के पद से भी इस्तीफा दे दिया था। अनवर पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार से नाराज चल रहे थे। अनवर वर्तमान में बिहार के कटिहार से लोकसभा सांसद थे और पवार के काफी करीबी माने जाते हैं। अनवर और लोकसभा स्पीकर पीए संगमा ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर शरद पवार के साथ मिलकर एनसीपी का गठन किया था।
इनके अलावा एनसीपी के कभी कद्दावर नेता माने जाने वाले और 16वीं लोकसभा में सतारा सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो बार सांसद रह चुके उदयन राजे भोसले भी पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। सतारा सीट से भोसले के बतौर आरपीआई उम्मीदवार चुनाव लड़ने की चर्चा सियासी गलियारों में है। सांसद उदयनराजे भोसले छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज हैं और यहीं वजह है कि लोग इनको आज भी अपना राजा मानती हैं। आम जनता के बीच ये इस कदर लोकप्रिय हैं कि इन्हें लोग बिना मांगे ही वोट दे देते हैं। इनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश में मोदी लहर होने के बावजूद भी इन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में पांच लाख से ज्यादा वोट पाए थे। 16 वीं लोकसभा में सांसद रहने से पहले 2009 में वह कांग्रेस की टिकट पर भी सांसद चुने जा चुके हैं। इसके अलावा वे महाराष्ट्र में भाजपा सरकार के कार्यकाल में राजस्व मंत्री भी रह चुके हैं। उदयन कई विवादों के लिए भी सुर्खियों में रहें हैं।
शरद पवार एक वरिष्ठ भारतीय राजनेता हैं, जो नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं। वे तीन अलग-अलग समय पर महाराष्ट्र राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। एक प्रभावशाली नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले शरद पवार केंद्र सरकार में भी रक्षा और कृषि मंत्री भी रह चुके हैं। इसके बावजूद मौजूदा दौर में अपनों का साथ छूटना उनके और उनकी पार्टी के लिए एक चिंता का कारण बन सकती है। तीन-तीन कद्दावर नेताओं को पार्टी से छिटकना नि:संदेह उनकी एनसीपी को कमजोर करेगी। उनके अपनों का ही साथ छोड़कर जाना एनसीपी की गिरती साख का ही परिचायक है।
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