कांग्रेस को मर्यादा समझनी चाहिए
ईश्वर किसी के साथ हरपल नहीं रह सकता, इसलिए उसने ‘मां’ की रचना की। भारतीय संस्कृति ही नहीं, विश्व की तकरीबन हर संस्कृति में ‘मां’ को पूज्यनीय और वंदनीय है। मां, पिता, बुजुर्ग और गुरु का सम्मान करने की हमारी संस्कृति रही है। उसी भारत में उत्तर प्रदेश इकाई के कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को लेकर इंदौर की चुनावी रैली में जो कुछ कहा, वैसा तो घोर शत्रु देश पाकिस्तान भी नहीं करता। पाक के तत्कालीन प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ का ‘मां’ के प्रति नजरिया तो कम से कम हमारे देश के राजनीतिज्ञों से बेहतर ही है।
साल 2015 के अंत में पाक गए मोदी ने नवाज शरीफ की मां के पैर छुए और शॉल भेंट किया, तो नवाज ने भी मोदी की मां के लिए तोहफे में साड़ी भिजवाई थी। दो दुश्मन देशों के प्रमुखों का भी मां के प्रति सम्मान का नजरिया है, तो अपने देश भारत में ही ‘मां’ को लेकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राज बब्बर ने जो ओछा बयान दिया है, उससे हर भारतीय शर्मसार महसूस कर रहा है। राज बब्बर ने पीएम नरेंद्र मोदी की मां को लेकर कहा है कि आज रुपया आपकी (पीएम मोदी) पूज्यनीय माताजी की उमर के करीब नीचे गिरना शुरू हो गया है। राज बब्बर ने इससे पहले भी छत्तीसगढ़ चुनाव के दौरान नक्सलियों को लेकर विवादित बयान दिया था कि वो क्रांति के लिए निकले हैं। गोलियों से फैसले नहीं होते, उनके सवालों को सुनना पड़ेगा। विवादित बोल के लिए कांग्रेस के कई बड़े नेता अक्सर सुर्खियों में रहे हैं। इसमें सीपी जोशी, मणिशंकर अय्यर, संजय निरूपम, नवजोत सिंह सिद्धू जैसे नेता शामिल हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उमा भारती की जाति और धर्म पर सवाल उठाकर सुर्खियों में बने रहने की कोशिश की। वहीं सिद्धू ने भी मोदी को लेकर कहा था कि जो लहर थी 2014 की वह आम आदमी पर कहर और जहर बन गई है। कांग्रेस नेताओं में संजय निरूपम ने तो सितंबर 2018 में पीएम मोदी को अनपढ़ और गंवार तक बता दिया। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने तो न जाने कितनी बार मर्यादाओं को ताक पर रखा है। पिछले साल गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पीएम को ‘नीच’ तक कह दिया था।
फिलहाल राज बब्बर के इस बयान के बाद कांग्रेस को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। यह सही है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और सभी दल हर हाल में जीतना चाहते है। गलत है, तो बस इतना कि इस सियासी घमासान के बीच अक्सर राजनेता अपनी मर्यादा भूल रहे हैं और गरिमाविहीन, अमर्यादित बयानबाजियां कर रहे हैं। इससे कहीं ऐसा ना हो 2019 में सत्ता का सपना देख रही कांग्रेस को उसी के नेताओं की अमर्यादित बयानबाजी ले डूबे।
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