श्री गणेशाय नमः

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Friday, January 25, 2019

नकली ‘ आदिवासी, ‘असली ‘ फायदा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का व्यक्तित्व ही ऐसा है कि लोग उनसे उम्मीद लगा बैठते हैं। देवेंद्र भी उन्हें निराश नहीं करते। अपनी ओर से पूरी कोशिश करते हैं और सबको यथायोग्य देते भी हैं। आपने मराठा लोगों को देखा। उन्होंने अपनी मांगें आम तौर पर बहुत ही शालीन ढंग से रखीं और अब वे पूरी होने जा रही हैं। इसी से उत्साहित होकर आदिवासी समाज भी उनसे अपनी पीड़ा बताने जा पहुंचा। कहने की जरूरत नहीं कि उन्हें भी मुख्यमंत्री निराश नहीं करेंगे।
इन आदिवासियों का मामला थोड़ा अलग तरह का है। इन्हें कुछ मांगना नहीं है। इन्हें पहले से ही मिला हुआ है। इनकी शिकायत ये है कि जो लाभ इन्हें मिलना चाहिएवो लाभ दूसरे लोग आदिवासी बनकर उठा ले जा रहे हैं। कायदे से देखा जाए तो ये अफसरों से मिलीभगत करके फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार का मामला है। आदिवासियों की मांग यही है कि ऐसे लोगों को दंडित किया जाए। जो अधिकारी मिलीभगत करके फर्जी सर्टिफिकेट बना रहे हैंउन्हें भी और जो बनवा रहे हैंउन्हें भी समान रूप से दंडित किया जाना चाहिए।
यह किसी को भी बताने की जरूरत नहीं कि आदिवासी समाज के सबसे पिछड़े तबकों में आते हैं। इसीलिए उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में रखा गया है। आम तौर पर ये जंगलों में रहते हैं और अभी भी विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर हैं। इन्हें मुख्य धारा में शामिल करने के लिए सरकार कोशिश भी कर रही है और सफलता भी मिल रही है।
पूरे महाराष्ट्र में आदिवासी समाज की आबादी करीब 11 प्रतिशत है। देश में आदिवासियों के अधिकार को सुनिश्चित करने को संविधान में भी जगह दी गई है। इसका हर हाल में पालन किया जाना चाहिए। प्राथमिकता के आधार पर आदिवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करते हुए उनके हक में बनाए गए कानूनों को पूर्णतया लागू किया जाना जरूरी है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आदिवासियों के बीच एक अरसे से काम कर रहा है। अपने काम की वजह से वह आदिवासियों के बीच लोकप्रिय भी खूब है। भाजपा भी उनके प्रति काफी सहृदय है। अगर लोग फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर इनका हक मार रहे हैं तो इस पर मुख्यमंत्री को संज्ञान लेना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। आदिवासी बहुत उम्मीद लेकर उनसे फरियाद करने पहुंचे हैं।



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