-गेहूं पर बढ़ी सब्सिडी का तोहफा
आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी भारत का किसान बदहाल है। इन सात दशकों में जितनी भी सरकारें आई और गई, इनमें से ज्यादातर ने किसान को राजनीति का जरिया बनाया। किसान को लेकर राजनीति तो होती रही, लेकिन दुर्भाग्य है कि उसको लेकर कोई कारगर नीति अभी तक नहीं बनी है। किसानों के हित और उनकी आर्थिक तरक्की की दुहाइयां भी हर नेता और दल देता रहा है, लेकिन व्यवहारिकता के धरातल पर कोई काम नही हुआ।
अब जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी है, तो इस सरकार ने भी सत्ता में आने के लिए किसानों के हित में कई वादे किए हैं। अब बारी उनको निभाने की है। वास्तव में अन्नदाता किसानों की पीड़ा ये है कि अगर अनाज उत्पादन कम हो तो दिक्कत। ज्यादा हो, तो भी दिक्कत। कम होने पर किसान लागत तक नहीं निकाल पाता। अगर प्रकृति ने साथ दिया और जोरदार उत्पादन हुआ, तो उसका उचित लाभ किसानों को नहीं मिलता। यहां तक कि उम्दा क्वालिटी के बीज के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। सुरसा की तरह बढ़ती महंगाई के बीच सरकार की ओर से उन्हें बीज पर जो सब्सिडी मिलती है, वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान होती है। ऐसे में अपने वादे के अनुसार, रबी की फसल में गेहूं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से किसानों को कम दर पर गेहूं का बीज उपलब्ध कराने का लिया गया निर्णय वादा निभाने की दिशा में एक प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सूबे के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की ओर से जो घोषणा की गई, उसके अनुसार प्रदेश सरकार ने गेहूं के बीज पर सब्सिडी 50 से बढ़ाकर 60 फीसद कर दी है। इससे अब गेहूं का बीज जो प्रति क्विंटल 3200 रुपए में मिलता था, वह अब महज 1320 रुपए में मिल सकेगा। ये रकम भी सीधे किसान के खाते में ट्रांसफर होगी।
असल में अब किसान को राजनीति नही, बल्कि नीति की दरकार है। हाल ही में किसानों के आंदोलन के दौरान सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पार्टी पर किसान शोषण का आरोप मढ़ते हुए कहा कि आज किसानों की जो भी बदहाली है, उसके लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार है। कांग्रेस आज अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस समय किसान आंदोलन में आग में घी डालने का काम कर रही है। इन आरोपों-प्रत्यारोपों से इतर अगर बात केवल उत्तर प्रदेश की करें, तो यहां योगी आदित्यनाथ सरकार ने कैबिनेट की पहली बैठक में 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपए के कर्ज माफ कर देश में किसानों के हित में सबसे बड़ा फैसला लेते हुए पैसे उनके खातों में भेज दिए हैं। चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया 24 हजार करोड़ और इस चालू पेराई सीजन के 10 हजार करोड़ रुपए का भुगतान कराकर नया इतिहास बनाया है।
इतना ही नहीं, आलू किसानों से पहली बार आलू 487 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर खरीदने के साथ ही आलू को 300 किमी से अधिक दूरी पर ले जाने पर 50 रुपए प्रति क्विंटल का अनुदान और मंडी शुल्क माफ कर एक नई शुरुआत की गई है। धान की 35 लाख मीट्रिक टन खरीद की गई है। योगी सरकार के पूर्व सूबे में उड़द और मूंग की खरीद नहीं होती थी, पर वर्तमान सरकार ने उड़द और मूंग की खरीद की है। एक साल से भी कम समय में 20 हजार किसानों को सोलर पंप और उस पर 350 करोड़ रुपए अनुदान दिया है। प्रदेश के सभी 97 हजार 814 गांवों में वर्मी कल्चर यूनिट लगाई जा रही है। पहली बार प्रदेश में किसानों को बिना कतार लगाए खाद-बीज की उपलब्धता हो रही है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि प्रदेश सरकार किसानों को उनका उचित हक दिलाने की दिशा में प्रयासरत है। अब अगर योगी ने किसानों की सुध ली है, तो ये उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले वर्षों में भी सरकार किसानों के उत्थान की दिशा में ऐसे ही प्रयासरत रहेगी।
No comments:
Post a Comment