—गरीब,असहाय किसानों के बच्चों को फ्री छात्रावास
आम तौर पर गरीब
और असहाय किसानों के बच्चों के सामने शिक्षा का संकट रहता है। कई बार हाड़तोड़
मजदूरी करने के बावजूद किसी तरह किसान अपने बच्चे के लिए फीस वगैरह की व्यवस्था तो
कर लेता है, लेकिन शहर में
किराए के मकान में रखकर या फिर छात्रावास की फीस देने के लिए उनके पास धन नहीं
होता। ऐसे में उनके बच्चे सिर्फ पंख फड़फड़ाकर रह जाते हैं और वे शिक्षा की ऊंची
उड़ान नहीं भर पाते। ऐसे में किसानों के लाल के इस सपने को साकार कर रही है
महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी पंजाबराव देशमुख योजना। जी हां, महाराष्ट्र कैबिनेट द्वारा पंजाबराव देशमुख
योजना के तहत किसानों के बच्चों के लिए छात्रावास शुल्क योजना की शुरुआत की है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए उन गरीब और
असहाय किसानों को सहायता मिल रही है,जो अपने बच्चों का पालन पोषण करने में सक्षम नहीं हो पाते। उनके सपनें तो होते
हैं कि वे अपने लाडलों को बेहतर तालीम दें, लेकिन धनाभाव में वे मन मसोसकर रह जाते हैं। कई बार तो
उन्हें अपने जीवन के कई अन्य सपनों की कुर्बानियां भी देनी पड़ती है। अगर किसी तरह
किसान बच्चे की फीस वगैरह की व्यवस्था कर भी लेते हैं, तो उनके सामने शहर में बच्चों को रखकर शिक्षा दिला पाना एक
टेढ़ी खीर होती है। ऐसे में कई गुदड़ी के लाल शिक्षा के प्रकाश से वंचित रह जाते
हैं। इससे एक ओर जहां किसान को क्षति होती है, वहीं राज्य और राष्ट्र को भी एक बेहतर मेधा को गंवाना पड़ता
है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार की ये योजना कई मायनों में लोककल्याणकारी साबित हो
रही है।
बता दें हाल ही
में राज्य सरकार द्वारा गरीब किसान के बच्चों के लिए छात्रावास शुल्क प्रदान करने
की योजना बनाई है। महाराष्ट्र सरकार की इस योजना का कुल बजट 1000 करोड़ रुपए रखा है। योजना के तहत महाराष्ट्र
सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि जिन विद्यार्थियों की पारिवारिक आय छह लाख
रुपए से कम है, उनको मेडिकल और
इंजीनियरिंग सहित किसी भी पेशेवर और उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए फीस मिलेगी। यह
योजना राज्य के उन सभी किसानों के लिए लागू है, जिनकी आय छह लाख रुपए तक है। जिस प्रकार से ओबीसी को 50 प्रतिशत शिक्षा में छूट मिलती है, उसी प्रकार से अब छह लाख रुपए से कम आय वालों
को भी यह सुविधा दी जा रही है। बशर्त कि छात्र को कुल अंको में से 60 प्रतिशत नंबर लाने अनिवार्य हैं। योजना खासतौर
से उन किसानों के लिए लागू है, जिन्हें आपदाओं
के कारण फसलों पर अधिक नुकसान झेलना पड़ता है। इन सबके बीच किसान अपने परिवार की
जरुरतों को पूरा नहीं कर पाता। वहीं इन्हें बच्चों की शिक्षा में भी कटौती करनी
पड़ती है। ऐसे में राज्य सरकार उन गरीब किसानों की मदद करेगी, जो एक गरीब तबके से आते होंगे। ऐसे बच्चों को
सरकार द्वारा नि:शुल्क छात्रावास प्रदान किया जाएगा, जिससे यह छात्र भी अपने सपनों को पूरा करने में कामियाब हो।
अक्सर देखा गया है कि कई छात्र घर की आर्थिक स्थिति के कारण उच्च शिक्षा मजबूरी
में छोड़ देते है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला छात्रावास शुल्क इन
लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
यह यह बता दें कि
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राजर्षि शाहू महाराज फीस प्रतिपूर्ति योजना पहले
सिर्फ एससी- एसटी और ओबीसी विद्यार्थियों के लिए लागू की थी। उन्होंने कहा था कि
एससी- एसटी छात्रों को फीस में 100 प्रतिशत,
जबकि ओबीसी विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत छूट प्राप्त थी। अब इसका विस्तार उन
सभी विद्यार्थियों के लिए जा रहा है, जिनकी पारिवारिक आय छह लाख रुपए से कम है और जिन्होंने दाखिले के वक्त 50 प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त किए हैं। 2.5 लाख रुपए की पारिवारिक आय वालों के लिए कोई
शर्त नहीं है। इस योजना में जिस किसान की कम जमीन है, उसके बच्चों को शहर में पढ़ाई कर सकते हैं।
बता दें कि इस
फैसले से सरकारी कॉलेजों के छह हजार विद्यार्थियों और निजी स्कूलों के 1.45 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। सीमांत
किसानों और पंजीकृत मजदूरों के बच्चों के छात्रावास की फीस भरने के लिए पंजाबराव
देशमुख योना को लागू करने का फैसला सरकार द्वारा लिया गया है। बड़े शहरों में यह
राशि 30 हजार रुपए प्रतिवर्ष,
जबकि जिला स्तर के शहरों में 20,000 रुपए प्रतिवर्ष होगी। योजना के तहत प्रत्येक
विद्यार्थी महाराष्ट्र राज्य समेत भारत के किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से
उच्च शिक्षा के लिए लाभान्वित हो सकेगा। साथ ही राज्य सरकार की इस योजना के जरिए
कहीं भी मुफ्त रह पाएगा। प्रत्येक छात्र, तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के अलावा अन्य पाठ्यक्रमों में अपनी पढ़ाई
के लिए राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहायता ले सकेगा, हालांकि यह सहायता छात्रावास के लिए दी जाएगी।
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