दशकों पुरानी सिखों की उम्मीदें पूरी हुई...
साल 2008 में जबसे मुंबई में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हमला किया था, तब से 26/11 का नाम आते ही हमारे दिमाग में उसी घटना का खौफनाक मंजर घूम जाता है। लेकिन अब जब 26/11 का नाम आएगा, तो हमारे दिमाग में सिर्फ मुंबई हमले की घटना पटल पर नहीं आएंगी, बल्कि करतारपुर साहिब गुरुद्वारा और संविधान दिवस जैसी घटनाएं भी घूमेंगी। आज इसकी भारत ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा की आधारशिला रखकर शुरुआत की है। भारत में आने वाले हिस्से का निर्माण केंद्र सरकार, जबकि पाकिस्तान में आने वाले हिस्से का निर्माण पाकिस्तान सरकार करेगी। 28 नवंबर को पाकिस्तान में भी ऐसा ही आयोजन होगा।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, हरदीप पुरी, विजय सांपला, राज्यपाल बीपी सिंह बदनौर, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की मौजूदगी में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने करतारपुर कॉरीडोर का नींव पत्थर रखा। आजादी के बाद सिखों की ये सबसे बड़ी घटना है। अब तक श्रद्धालु वहां जा नहीं पाते थे। कॉरीडोर से अब ये दरवाजा खुल गया है। ऐसे में अब 26/11 करतारपुर साहिब गुरुद्वारा के कॉरीडोर खुलने के लिए भी जाना जाएगा। कॉरिडोर पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा तक जाएगा। इस कॉरिडोर से भारत के लाखों तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान में रावी नदी के तट पर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर जाने की सुविधा मिलेगी, जहां गुरु नानक देव ने अपने 18 साल बिताए थे। अब तक यहां जाने के लिए तीर्थयात्रियों को काफी मशक्कत कर वीजा लेना पड़ता था, जो अब नहीं होगी। वे 1539 में गुरु नानक जी के निधन के बाद निर्मित कराए गए इस पवित्र गुरुद्वारे पर मत्था टेक सकेंगे।
26/11 को ही संविधान दिवस भी मनाया जाता है, लेकिन ये अब तक किताबों तक ही सीमित रहा है। हाल ही डॉ.भीमराव अंबेडकर को लेकर जो बातें चलीं, उससे सभी लोग जान गए कि संविधान दिवस क्यों और कब मनाया जाता है। 26 नवंबर 1949 को ही भारतीय संविधान सभा की तरफ से इसे अपनाया गया और 26 नवंबर 1950 को इसे लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया। यही वजह है कि 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर चल रही हलचल के बीच भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज अयोध्या पहुंचे और वे अपने साथ संविधान के एक प्रति भी ले गए। इसे उन्होंने अयोध्या को जिलाधिकारी को सौंपकर जिले में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन करने के लिए कहकर संविधान दिवस की याद ताजा कर दी है।
यह सही है कि 26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई को बम धमाकों और गोलीबारी से दहला दिया था। इस आतंकी हमले को 10 साल हो गए हैं, लेकिन यह भारत के इतिहास का वो काला दिन है, जिसे कोई भूल नहीं सकता। हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मुंबई हमले को याद करके आज भी लोगों को दिल दहल उठता है। अब जब इस दहशतभरे माहौल में अगर कुछ सकारात्मक पहलें हुई हैं, वे भी अब हमेशा याद रहेंगी।
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