श्री गणेशाय नमः

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Friday, January 25, 2019

‘शेतकरी सम्मान योजना’ का लाभ उठा रहे किसान



यह अजीब विडंबना है कि जो अन्नदाता अपने खूनपसीने और मेहनत के बूते चराचर जगत का पोषण करता हैअमूमन वही भूखलाचारी और आत्महत्या जैसी त्रासदियों से भी गुजरता है। शासन की कोशिशें भी यही रही है कि वह किसानों के हकहकूक और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरा जा सके। इस दिशा में महाराष्ट्र की देवेंद्र फणनवीस सरकार की पहल की नि:संदेह सराहना की जानी चाहिए। बतौर बानगी अगर महाराष्ट्र सरकार की छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना को ही लेंतो राज्य में दम तोड़ते किसानों को ये योजना जीवनदान दे रही है।
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना 2017’ (महाराष्ट्र कृषि ऋण छूट योजना) के लिए वेबसाइट शुरू की है। इसमें राज्य के सभी अन्नदाता किसान ऋण माफी योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कर अपना भविष्य सुधार सकते हैं। योजना के तहतकिसान जिन्हें पहली अप्रैल 2009 के बाद फसल या टर्म लोन ले लिए हैं और 30 जून 2016 तक उसे वापस चुकाया नहीं हैउन्हें 1.5 लाख रुपए के ऋण छूट के लिए पात्र माना जा रहा है। जिन किसानों का ऋण 1.5 लाख रुपए से ऊपर हैउन्हें पूरे लाभार्थी के हिस्से का भुगतान करने की जरुरत होगीक्योंकि वह सरकार से1.5 लाख रुपए प्राप्त करने के योग्य होंगे। यह योजना तब और भी आवश्यक हो जाती हैजब अक्सर ये खबरें प्रकाश में आती रहती हैंजब महाराष्ट्र में किसान कर्ज के तले दबकर दम तोड़ रहे हैं। महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य में पिछले तीन साल की भाजपा सरकार के कार्यकाल में 10 हजार किसानों ने फसल खराब होने और कर्ज के चलते आत्महत्या कर ली है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि सरकार द्वारा किसानों की कर्जमाफी की घोषणा के बाद भी राज्य में किसानों को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है और संकटग्रस्त इलाकों में आत्महत्याएं जारी हैं। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में जनवरी से अब तक 907 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर में कहा गया है कि मराठवाड़ा क्षेत्र के आठ जिलों में अब तक करीब 907 किसानों ने आत्महत्या की। अधिकारी इन आत्महत्याओं की वजह फसलों का खराब होना और किसानों पर बढ़ते कर्ज बता रहे हैं।’ खबरों में कहा गया है कि औरंगाबाद डिवीजनल कमिश्नरेट के मुताबिक, ‘अब तक 907आत्महत्याओं में बीड़ जिले में सर्वाधिक 187, नांदेड़ में 141, औरंगाबाद में 125, उस्मानाबाद में 119 और परभणी जिले में 118 किसानों ने आत्महत्या की है। तीन अन्य जिलों जालनाहिंगोली और लातुर में करीब 100 से अधिक किसानों ने खुदकुशी की है।
ऐसे में महाराष्ट्र सरकार की यह योजना नि:संदेह एक सराहनीय फैसला है। इस योजना से यह उम्मीद की जा सकती है कि किसानों की मौत के सिलसिले में न सिर्फ गिरावट आएगीबल्कि खुद किसानों की उम्मीदों को भी पंख लग सकेंगे। बेटे की शिक्षादीक्षा और बिटिया की शादी के अरमान पूरे होंगेतो नि:संदेह किसानों की आत्महत्या की दर में भी गिरावट आएगी। अमूमन किसान खेती के लिए साहूकारों से कर्ज लेते हैंजो हजारों में होता है। साहूकार ही उसे ब्याज दर ब्याज बढ़ाते हुए लाखों तक पहुंचा देते हैं। ऐसे में शासन की इस योजना के तहत मिलने वाले कर्ज से उनको राहत मिलेगी। छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना से किसान अपना खोया हुआ आत्मसम्मान पा सकेंगेतो दूसरी ओर आत्महत्या के मामलों में भी कमी आएगी। दरअसलकरीब 1.5 लाख रुपए का कर्ज माफ होना कोई छोटी बात नहीं है। अमूमन इस रकम से छोटे और मझले किसानों को जरूर राहत मिल सकेगी। ये वे किसान होते हैंजो खादबीजउर्वरक आदि के लिए कर्ज लेते हैं। बैंक से कर्ज लेने के बाद अगर सूखे की नौबत आईतो किसान कहीं के नहीं रहते। पैदावार न होने से वे कर्ज नहीं चुका पाते। ऐसे में उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है और उनके पास मौत को गले लगाने के सिवाय और कोई रास्ता शेष नहीं बचता। ऐसे में अगर किसानों का यह कर्ज माफ हो गया हैतो ऐसे बहुतायत किसान अपनी जिंदगी चैन और सुकून से बिता सकेंगे। यह अलग बात है कि विपक्ष किसानों की मौतों में अपना सियासी जीवन तलाशता हैलेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैंजिन पर सियासत के बजाय मानवता को तवज्जो देनी चाहिए। शासन की इस योजना के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए और विपक्ष को भी इसे मुक्तकंठ से स्वीकार करना चाहिए।
 अगर सियासत के आइने में देखेंतो यही वह मुद्दा हैजिस पर विपक्ष अक्सर अपनी आंखें तरेरता रहता है। ऐसे में सरकार की यह योजना उनके इरादों पर पानी फेरती दिख रही है। फणनवीस सरकार के इस फैसले से सरकारी कोष पर करीब 34 हजार करोड़ रुपए का बोझ आया हैइसके बावजूद किसानों की जिंदगी के आगे ये कुछ भी नहीं है। सरकार का तो यहां तक दावा है कि इससे प्रदेश के करीब 90 प्रतिशत किसानों को राहत मिल रही है और भविष्य में भी मिलेगी। ऐसे में यह उम्मीद करना उचित ही होगा कि सरकार इस योजना को वास्तविक किसान तक पहुंचाया जाए और किसानों की डूबती नैया को एक नया तारणहार दिया जा सके।


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