पिछले साढ़े चार साल में ‘करिश्माई विकास’ हुआ है
विपक्ष अक्सर ये सवाल पूछता रहता है कि आखिर कहां है ‘अच्छे दिन?’ कब आएंगे ‘अच्छे दिन?’। इसको लेकर वे हमेशा मोदी सरकार पर निशाना साधते हैं और व्यंग्य भी करते हैं। इसका सटीक जवाब केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दिया है। उन्होंने कहा है कि असल में जैसी हमारी सोच होती है, हम किसी व्यक्ति विशेष या संस्था के प्रति वैसा ही नजरिया पाल लेते हैं। अगर हम शासन की ओर से किए गए प्रयासों को सकारात्मक नजरिए से देखें, तो हमें चीजें धीरे-धीरे सकारात्मक दिखने लगती हैं। ठीक उलट, अगर हर बात में मीन-मेख निकालें और कमियां ही देखें, तो हर अच्छी चीज में भी कहीं न कहीं बुराई दिख ही जाती है। बस, ये सवाल हमारे नजरिए का है कि हम क्या देखते हैं?
राजनाथ सिंह भोपाल की एक जनसभा में बोल रहे थे। आपको मालूम है कि मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों बाद विधान सभा के लिए वोट पड़ने वाले हैं और राजनाथ सिंह भाजपा का प्रचार करने गए थे। उन्होंने लोगों को समझाते हुए कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में जो करिश्माई काम हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किए हैं, उससे भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था हो गई है। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो वर्ष 2035 तक भारत विश्व की तीन अर्थव्यवस्थाओं में एक हो सकता है।
वास्तव में केंद्र सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं, जिन्होंने समान रूप से न सिर्फ गंवई संस्कृति में व्यापक बदलाव किया है, बल्कि आज गांवों में उगते और ढलते सूरज के साथ लकड़ी के चूल्हे से उठने वाले धुएं नहीं दिखते। ‘उज्जवला योजना’ से अमूमन अधिकांश घरों में एलपीजी सिलेंडर पहुंच चुका है। किसानों की कर्ज माफी, छोटे व्यापारियों के हित में लिए गए कई निर्णय आदि अनेक ऐसे क्षेत्र में सरकार के उठाए कदमों ने आम जनमानस को ‘अच्छे दिन’ का अहसास कराया है। हो सकता है कि इसमें कुछ कमियां हो। यह तो सबमें रहती हैं, पर तुलनात्मक दृष्टि से बढ़िया करने वाली राजनीतिक पार्टी भाजपा ही है।
वास्तव में अगर विपक्ष ये सोच रहा है कि ‘अच्छे दिन’ नहीं आए हैं, तो ये उसकी नकारात्मक सोच का असर है। राजनाथ ने ने ठीक ही कहा है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में कांग्रेस ने भारत की राजनीति एवं भारत के नेताओं के प्रति विश्वास का एक बड़ा संकट पैदा किया है। यह विश्वास का संकट कांग्रेस नेताओं की ‘कथनी और करनी’ में अंतर होने से है। ‘अच्छे दिन’ को लेकर राजनाथ के किए पलटवार में एक बात जो आज साफ दिख रही है, वह यह कि अर्थव्यवस्था में जो भारत चार साल पहले नौवें स्थान पर था, अब छठे स्थान पर है। ये मोदी सरकार का करिश्माई विकास नहीं, तो और क्या है? वास्तव में विपक्ष ने अपनी यह छवि बना रखी है कि मोदी सरकार जो भी करेगी, बस उसका विरोध करना है। भले ही वह कितनी ही जनकल्याणकारी क्यों न हो? जब तक विपक्ष अपना ये नजरिया नहीं बदलेगा और नकारात्मक देखने वाला चश्मा नहीं उतार फेंकेगा, तब तक उसे ‘अच्छे दिन’ दिखेंगे भी कैसे?
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