श्री गणेशाय नमः

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Friday, January 25, 2019

आंदोलन के बीच ‘वोटों की खेती’

मराठा आंदोलन की आग में कांग्रेस का घी
महाराष्ट्र की सियासत में मराठा आंदोलन के रूप में खड़े भूचाल के बीच यहां विपक्ष वोटों की खेती करने की जुगत में है। यह जानते हुए भी कि महाराष्ट्र में भाजपा का कोर वोटर हमेशा से ओबीसी ही रहा है। इसके बाद भी कांग्रेस यह बात आसानी से समझने को तैयार नहीं है। देवेंद्र फड़णवीस सरकार ने आरक्षण के मुद्दे को ठंडा करने के इरादे से पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया था। भाजपा जानती है कि मराठा समाज जितना आक्रामक होगादलित और ओबीसी उतना ही गोलबंद होंगे। शायद यही वजह है कि भाजपा भी मराठा समाज के सामने दंडवत होते नहीं दिखना चाहती।
 भाजपा जानती है कि ओबीसी समाज अपने कोटे का आरक्षण मराठा समाज के साथ किसी कीमत पर साझा नहीं करेगा। इसलिए जो भी मराठा आरक्षण के समर्थन में जरूरत से ज्यादा उछल-कूद मचाएगाउसे ओबीसी की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। इसके विपरीत यहां वोटों की राजनीति इस कदर हावी है कि प्रदेश कांग्रेस इसे तूल दिए रखना चाहती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण मराठा आरक्षण के मुद्दे पर विधानमंडल का विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग तक कर रहे हैं। शायद वह यह भूल गए हैं कि कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने अपने दौर में जानते-बूझते हुए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत आरक्षण दिया था। तब कोर्ट ने न सिर्फ उसे गैर-संवैधानिक करार दिया थाबल्कि रोक भी लगा दी थी। ऐसे में वह उसके लिए भाजपा पर दबाव आखिर कैसे डाल सकते हैं। दरअसलसच यह है कि अब कांग्रेस को डर सता रहा है कि उसकी सहयोगी एनसीपी हमेशा से ही मराठा राजनीति के लिए जानी जाती हैइसलिए कहीं उसे इसकी कीमत न चुकानी पड़ जाए। कांग्रेस के ज्यादा उछलने से दलित बिदक सकते हैं। एनसीपी सुप्रीमो और मराठा छत्रप शरद पवार इस आंदोलन को लेकर पहले भी खामोश थे और अब भी मुंह नहीं खोल रहे हैं।
 इन सबके बीच यह भी सच है कि राजनीतिक समीकरण अपनी जगह हैंलेकिन देवेंद्र सरकार यह कतई नहीं चाहती है कि किन्हीं कारणों से यहां की सियासी फिजा में जहर घुले। मुख्यमंत्री की कोशिश है कि जल्द से जल्द यह मुद्दा ठंडा हो और विपक्ष भी इस नेक काम में साथ दे। इसके बावजूद कांग्रेस के सिपहसालार इस बात को आसानी से समझने को तैयार ही नहीं हैं। इससे प्रदेश को जनहानि और संपत्ति की हानि भी उठानी पड़ रही है। वक्त की नजाकत यही कहती है कि कांग्रेस को अपनी ओछी सियासत को छोड़कर भाजपा और मुख्यमंत्री देवेंद्र के कदम के साथ कदमताल करे। आरक्षण जायज हैलेकिन वह भी उतना ही होजिससे समाज में वैमन्यस्यता का भाव न आ सके। इस बात को अगर मुख्यमंत्री समझ रहे हैंतो विपक्ष को भी इस बात को समय रहते समझना ही होगा। अन्यथा इससे किसी का भी भला होने वाला नहीं है।



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