-कम समय में ज्यादा फसल उगा सकेंगे किसान
किसान आमतौर पर दो तरह की मार सहते हैं। जब फसल अच्छी होती है, तो उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है और जब फसल कम हो जाती है, तब भी उन्हें सहना ही पड़ता है। इसके अलावा जब फसल अच्छी हो और दूसरे राज्यों में भी उसी तरह की बंपर फसल हो जाए, तो उनकी समस्या और बढ़ जाती है। दिक्कत ये है कि किसानों को इस संकट से उबारने के लिए न तो केंद्र सरकार पूरी तरह से योजना बना पा रही है और न ही राज्य सरकारें। ऐसे में महाराष्ट्र की देवेंद्र फणनवीस सरकार ने अपने राज्य के किसानों को इन तीनों ही तरह की मार से बचाने के लिए नायाब पहल की है।
महाराष्ट्र की देवेंद्र फणनवीस सरकार ने तीन महीने से परेशान चल रहे किसानों की समस्याओं को हल करने के अपने किए वादे को निभाने की ओर कदम बढ़ा रही है। फसलों के बंपर उत्पादन से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए देवेंद्र सरकार फसल चक्र की व्यवस्था को तोड़कर एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने जा रही है, जो वास्तव में आधुनिक खेती में ‘मील का पत्थर’ साबित हो सकती है। राज्य के किसानों को इससे उबारने के लिए तत्पर सरकार फसल चक्र, फसल उत्पादन प्रक्रिया और अपनाई जाने वाली तकनीक को बदलने की कोशिश में है। वास्तव में आज एक कृषि संबंधी उद्योग श्रृंखला की जरूरत है, जो खरीद, विपणन और भंडारण को एक सूत्र में पिरो सके। दूसरी, फसल चक्र में रबी और खरीफ में जिन फसलों का उत्पादन किया जाता है, सरकार इस प्रयास में है कि ये पुरातन पड़ चुका फसल चक्र तोड़ा जा सके। आज कृषि विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है और कुछ बदलाव के साथ अब हर मौसम में वह पैदावार पाई जा सकती है, जो पहले तक केवल रबी या खरीफ में ही सीमित थी। इससे किसानों के बंपर उत्पादन और उससे उत्पाद की कीमतों में आई गिरावट का संकट नहीं होगा और किसान अपने उत्पाद का उचित मूल्य पा सकेंगे।
जैसे अबकी राजस्थान में लहसुन की भारी पैदावार की तरह कुछ फसलों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, जिससे मूल्यों पर दबाव बढ़ गया है और उसमें भारी गिरावट आई है। मध्य प्रदेश में भी कई फसलों के कम दाम में बिकने से महाराष्ट्र के किसानों को होने वाले नुकसान का भरपाई न हो पाने से किसानों के सामने संकट है। अब अगर रबी का फसल का उत्पादन खरीफ और खरीफ की फसल का उत्पादन रबी सीजन में किसान करने लगेंगे, तो यह समस्या आएगी ही नहीं। ये प्रमुख समस्या जब हल हो जाएगी, तो किसानों की एक बड़ी समस्या सुलझ जाएगी और आर्थिक रूप से किसान उन्नति कर सकेंगे।
इसके बाद किसानों के कृषि कर्ज का भुगतान एक समस्या है, क्योंकि कृषि पूंजी बाजार में बैंकों की सीमित भूमिका नहीं है। यह पूर्णत: मुद्रा तरलता पर निर्भर है। किसान व व्यापारी दोनों कर्ज लेते हैं तथा दोनों अभी तक पूरी तरह नोटबंदी के असर से उबर नहीं पाए हैं। इस दिशा में भी सरकार विचार कर रही है। हो सकता है कि इस दिशा में भी कोई ठोस रास्ता निकल आए। अगर किसानों के उत्थान की दिशा में सरकार प्रयासरत है, तो ये उम्मीद की जा सकती है कि इसका प्रतिफल भी सकारात्मक ही आएगा। कम से कम फसल चक्र तोड़ने की दिशा में सरकार ने जो कदम बढ़ाया है, वह राजनीति से हटकर किया गया एक उम्दा कदम है और महाराष्ट्र के साथ ही देश की हर सरकारों को भी इस दिशा में विचार करने की जरूरत है।
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