श्री गणेशाय नमः

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Friday, January 25, 2019

सत्यव्रत के कांग्रेस छोड़ने के मायने

अभी तक राजनीति में ये होता रहा है कि जहां पिता होता हैवहीं लड़का अपना भविष्य देखता रहा है। शायद इसीलिए बड़े-बड़े नेताओं के लड़के उसी पार्टी में जाते रहे हैं और अपना भविष्य बनाते रहे हैं। पर कांग्रेस के एक नेता के साथ उलटा हुआ है। वो भी छोटे-मोटे नेता नहींबड़े कद वाले नेता के साथ। सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। वह भी इसलिए कि उनका लड़का समाजवादी पार्टी के टिकट पर मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ रहा है। इससे आप यह भी समझ सकते हैं कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत की संभावनाएं कितनी हैं।
सत्यव्रत चतुर्वेदी राजनीति का एक बड़ा नाम है। उनके परिवार का मध्य प्रदेश की कांग्रेस की राजनीति में अपना योगदान है। कांग्रेस भी सत्यव्रत चतुर्वेदी को काफी महत्व देती रही है। अभी भी वह उन्हें महत्व दे रही है। इसीलिए विधान सभा चुनावों में उसने सत्यव्रत चतुर्वेदी को स्टार प्रचारक का दर्जा दिया। पर उसने उनके बेटे को विधान सभा का टिकट नहीं दिया। ऐसा लगता है कि बेटे को टिकट न मिलने से सत्यव्रत चतुर्वेदी नाराज हो गए। हो सकता है कि बेटे ने भी उन्हें खरी-खरी सुनाई हो कि आप इतने बड़े नेता होकर भी एक टिकट तक नहीं दिलवा पाए। ऐसी पार्टी में क्यों रहा जाए। उसने खुद अपना कैरियर बनाने के लिए किसी पार्टी से चुनाव लड़ने का मन बनाया हो। ऐसा भी हो सकता है कि उनके बेटे ने अंदरखाने महसूस किया हो कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर वह जीत नहीं सकता। कांग्रेस के शासन काल में किए गए जन विरोधी कार्य उसका भी पीछा करेंगे। और उम्मीदवारों की तरह उसे भी हार का मुंह देखना पड़ सकता है। इसलिए उसने कांग्रेस से बच निकलने में ही भलाई समझी हो। ऐसा भी हो सकता है कि खुद सत्यव्रत चतुर्वेदी भी इस तथ्य को जानते हों। उन्होंने न तो अपने बेटे को रोका न ही मनाया कि ये क्या कर रहा है। बल्कि बेटे को जिताने के लिए कांग्रेस तक छोड़ दिया। इससे उनकी निष्ठा पर भी सवाल उठ रहा है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह उभरकर सामने आई है कि आम लोग ही नहींखुद कांग्रेसी भी कांग्रेस के साथ अपना अच्छा भविष्य नहीं देख रहे।


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