महाराष्ट्र सरकार की 'कृषि गुरुकुल योजना'
वित्तीय बजट 2016-17 में लागू की गई महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'कृषि गुरुकुल योजना' किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है। ये योजना ऐसी है, जिसमें न तो कोई विशेष टीम है और न ही कोई विशेष संस्था। इस महत्वाकांक्षी योजना में किसान ही गुरु है और किसान ही शिष्य। दोनों का तालमेल ऐसा कि कृषि की एक विधा जो दूसरा किसान नहीं जानता, दूसरा किसान उसे आसानी से अपनी भाषा में उसे प्रशिक्षित कर रहे है। इस तरह दोनों किसान एक साथ कई खेती की विधाओं को आसानी से सीख रहे हैं।
अब तक इस योजना के तहत 1664 किसानों को प्रशिक्षित किया गया है, जो उत्तरोत्तर बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि ये आंकड़ा अभी अनुमानित तौर पर ही है, क्योंकि जिस तेजी से इसका विकास हो रहा है, ये इससे कई गुना अधिक हो सकता है। इस बारे में सटीक आंकड़ा जुटा पाना संभव नहीं है। दरअसल, इस योजना का मुख्य उद्देश्य खेती और फूलों की खेती में नई तकनीक के बारे में किसानों को अधिक से अधिक शिक्षित करता है। कृषि के क्षेत्र में इस असाधारण कार्य को आसानी से अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार का यह प्रयास काफी कारगर साबित हो रहा है। ऐसे में सरकार अपनी महत्वाकांक्षी 'कृषि गुरुकुल योजना' को अधिक से अधिक क्षेत्रों में प्रसारित करने पर जोर दे रही है।
इस योजना के अंतर्गत पहले हर जिले के तीन किसानों को चयनित किया जा रहा है। ये किसान अपनी जानकारियों और सूचनाओं को आपस में साझा करते हैं। इसके साथ ही वे 25 अन्य लोागें को भी अपने अनुभव के साथ उन्हें खेती के गुर आसान भाषा और आसान माध्यम से सीखा रहे हैं। योजना के तहत खेती और खासकर फूलों की खेती में अग्रिम और विकसित तकनीक को अपनाया गया है। महाराष्ट्र सरकार की योजना के अनुसार इसमें मॉडल ट्रेनर और प्रशिक्षु किसान को मानदेय का भुगतान किया जा रहा है। बतौर बानगी यदि सत्र 2016-17 को ही लें, तो इस दौरान सरकार की ओर से आवश्यक धन उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा राज्य के हर जिले में हर साल कृषि महोत्सव का भी आयोजन किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ पा सकें। योजना के दो तरह के लाभ मिल रहे हैं। अव्वल तो इससे किसान समाज खेती की ओर प्रेरित हो रहा है और दूसरे कृषि व्यवसाय के विभिन्न प्रयासों के बारे में ज्यादा से ज्यादा किसान जागरूक हो रहे हैं।
महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में खेतों में किसानों के रोल मॉडल को नवीन तकनीक के बारे में बताया जाता है और उन्हें अधिक से अधिक व्यावसायिक खेती कर बेहतर लाभ कमाने के बारे में टिप्स दिए जाते हैं। इसमें उन तकनीकों को आपस में शेयर किया जाता है, जो दूसरे किसान नहीं जानते। कई बार ऐसा होता है कि अचानक ही कोई किसान खेती की नई विधा का निर्माण कर लेता है और वह विधा उसी तक सीमित रह जाती है। वहीं इस योजना से अब ऐसा नहीं होगा। अगर कोई किसान कम खर्च और कम समय में खेती का कोई टिप्स जान जाता है, तो वह इसमें अपनी बात दूसरे किसान को बताकर इस विधा का विकास करने में अपना अहम योगदान दे सकता है। मूल रूप से इस योजना के तहत बैठकों का आयोजन किया जाता है, जहां किसान शेष किसानों को अपना मार्गदर्शन और अपनी जानकारियों को एक-दूसरे को संप्रेषित करते हैं। सबसे जरूरी बात यह कि किसानों के इस आपसी तालमेल के बीच कोई तीसरा नहीं होता।
अब अगर इस कृषि गुरुकुल योजना के लाभ पर गौर करें, तो इसके असीमित लाभ दिखाई दे रहे हैं। अव्वल तो यह कि इस महत्वाकांक्षी योजना से किसान आसानी से नई प्रोद्योगिकियों और उसके कार्यान्वयन के बारे में प्रशिक्षित हो जाते हैं। ये आर्थिक विकास में योगदान देने के साथ ही दूसरे को इसे अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। हाड़तोड़ मेहनत और कम लाभ का संकट दूर हो रहा है, तो किसान स्मार्ट तरीके से खेती की जानकारियां हासिल कर रहे हैं। ज्ञान का विस्तार, साझाकरण, नई तकनीक के इस्तेमाल से अधिक उत्पादन और कमाई के बेहतर रास्ते खुल रहे हैं।
अब आपके जेहन में ये सवाल उठ रहा होगा कि आखिर इस योजना का लाभ कौन उठा सकता है, तो आपको बता दें कि हर किसान इस योजना के लिए पात्र है। शर्त यह है कि उसे महाराष्ट्र राज्य का निवासी होना चाहिए। योजना का लाभ पाने के लिए जरूरी दस्तावेजों में निवास का सबूत जैसे विद्युत बिल, जल कनेक्शन बिल, गैस कनेक्शन बिल, राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, कृषि भूमि प्रमाण आदि होना चाहिए। सबसे अहम बात तो यह है कि इसके लिए कोई आवेदन फार्म तय नहीं है। चयनित किसानों को ऐसे अभियानों का आयोजन करना होगा, जिसमें वे 25 अन्य किसानों को स्वेच्छा से शिक्षित कर सकेंगे।
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