बूथ लेवल इंतजाम में पिछड़ा ‘पंजा’
किसी भी चुनाव में जीत के लिए दो चीजें अहम होती हैं। पहला यूथ और दूसरा बूथ। यूथ इसलिए, क्योंकि यही वह तबका होता है, जो किसी भी दल के पक्ष में हवा बनाता है। युवा वर्ग दलों की सियासी मंशा को भी वोटरों के समक्ष बड़ी मजबूती से रखता है और हर स्तर पर पार्टी के लिए काम करता है। युवाओं के इस प्रयास को पार्टी के मत के रूप में बदलने के लिए बूथ स्तर पर मजबूती भी जरूरी होती है। हकीकत में इन दो स्तर पर मजबूती या कमजोरी ही किसी भी पार्टी की जीत या हार तय करती है।
यही वजह है कि मिशन-2019 में जीत की जुगत में जुटे भाजपा, सपा, बसपा समेत कई दल अनेक अभियान चलाकर न सिर्फ यूथ को अपने साथ जोड़ रहे हैं, बल्कि बूथ स्तर पर भी खुद को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही प्रयास कांग्रेस भी कर रही है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में मौजूदा जो स्थिति है, उसने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के माथे पर पसीना ला दिया है। उत्तर प्रदेश में राजनीतिक वजूद तलाशते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने हर बूथ से 10 सहयोगियों के नामों की सूची मांगी थी। हालात ऐसे हैं कि अब तक कांग्रेस को बूथ स्तर पर 10 लोग भी नहीं मिल पा रहे हैं, जो उनके लिए कार्य करने में रूचि दिखा सकें। शायद यही वजह है कि जिला व शहर अध्यक्ष ऐसे 10 सहयोगियों की सूची तक राहुल गांधी को नहीं भेज सके हैं। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस की चुनावी तैयारी के लिए एक बड़ा झटका मान रहे हैं।
इसके विपरीत मिशन-2019 की तैयारी में जुटे भाजपा, सपा, बसपा आदि अनेक दल खुद को बूथ स्तर पर काफी मजबूत कर चुके हैं और अभी भी इस प्रयास में मनोयोग से जुटे हैं। भाजपा विभिन्न अभियानों के साथ बूथ स्तर पर सक्रिय है। बसपा ‘बूथ जोड़ो अभियान’ चला रही है। 23 सदस्यों की टीम बूथ स्तर पर गली-गली में भाईचारा बैठक कर रही है। सपा ‘बूथ सम्मेलन’ कर चुकी है। बूथ कमेटी सदस्य 10 घरों का ग्रुप बनाकर 2019 के लिए एक साथ वोट मांग रहे हैं। आरएलडी ने बूथ स्तर पर ‘सद्भावना मुहिम’ के बाद युवाओं को जोड़ने के लिए हर वर्कर को दो वोट बनाने की काम दे रखा है।
ऐसे में यह कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिला और महानगर अध्यक्षों की निष्क्रियता की वजह से कांग्रेस का बूथ मैनेजमेंट प्लान ढेर हो गया। इसको लेकर चिंतित कांग्रेस नेतृत्व ने जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों को नाराजगी भरी चिट्ठी लिखकर न सिर्फ अफसोस जताया है, बल्कि तत्काल 10-10 बूथ सहयोगियों की लिस्ट मांगी है। अब कांग्रेस जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष इसलिए परेशान हैं कि हर बूथ पर जब उन्हें लोग मिल ही नहीं रहे, तो आखिर वे उनकी लिस्ट भेजें तो कैसे? ऐसे में वे काफी प्रयास तो करते दिख रहे हैं, लेकिन नहीं लगता कि वे इसमें कामयाब हो भी पाएंगे।
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