श्री गणेशाय नमः

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Friday, January 25, 2019

महाराष्ट्र के पत्रकारों की बल्ले—बल्ले



पत्रकार पेंशन के लिए 15 करोड़ आवंटित
बिहारहरियाणा आदि प्रांतों की तरह ही महाराष्ट्र के पत्रकारों को भी अब पेंशन मिल सकेगी। महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में 11,445 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांगें रखी हैजिनमें 15 करोड़ रुपये राज्य में वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन योजना लागू करने के लिए आवंटित किए गए है। इसे आचार्य बालशास्त्री जांभेकर सम्मान योजना नाम दिया गया है।
 बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में पत्रकार संरक्षण कानून विधेयक हाल ही में पारित किया गया था। वहीं अब राज्य मुख्यमंत्री फडणीस प्रत्येक पत्रकार की जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए राज्य में पेंशन योजना’ की शुरुआत करने जा रहे है। जिसके तहत राज्य के प्रत्येक पत्रकार को सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
दरअसलमीडियाकर्मी हमेशा से ही समाज में सुधार की अहम भूमिका निभाते आए हैं। वहीं सरकार और लोगों के बीच भी एक संतुलन स्थापित करने में कामियाब रहें है। देखा जाए तो मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैऐसे में उनके भविष्य का ख्याल रखना सरकार का पहला कर्तव्य है। शायद इसी प्रोत्साहन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रदेश सरकारों द्वारा पत्रकारों के लिए पेंशन योजना’ की शुरुआत की गई है। जिसके जरिए अब पत्रकार भी पेंशन के अधिकारी होंगे।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार राज्य में पत्रकारों के लिए एक पेंशन योजना का विस्तार करने जा रही है। जिस पर स्वयं राज्य मुख्यमंत्री फडणीस अध्ययन कर रहें है। दरअसलसरकार पत्रकारों के लिए पेंशन योजना के बारे में सकरात्मक है और अन्य राज्यों की पेंशन योजनाओं का अध्ययन कर रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र देश के पहले मुख्यमंत्री हैंजिन्होंने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की चिंता की और पत्रकारों को एक तरह से सरंक्षण प्रदान किया। नि:संदेह यह सच में सराहनीय योग्य है। महाराष्ट्र विधानसभा में पत्रकार सरंक्षण कानून विधेयक पारित किया गया है।
इसके अलावा महाराष्ट्र विधानसभा में पत्रकार संरक्षण कानून विधेयक भी पारित हो गया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक पत्रकार एवं पत्रकार संस्थाओं पर हमला करना अब दंडनीय अपराध माना जाएगा। इस विधेयक के तहत स्वतंत्र पत्रकार और कांट्रेक्ट पर नियमित रुप से पत्रकारों को भी सरंक्षण दिया जाएगा। इतना ही नहीं इस कानून के तहत पत्रकार पर हमला करने वालों और पत्रकारिता की आड़ में अनुचित काम करने वालों को तीन साल तक की सजा और 50 हजार रुपए तक जुर्माना भरना होगा। इसके अलावा हमलावर को पीड़ित पत्रकार के इलाज के लिए खर्च वहन करना होगा। मीडिया संस्थान पर भी हमला करने पर इसके नुकसान का हर्जाना देना होगा। अगर कोई झुठी शिकायत करता हैतो उस पर भी सख्ती भी बरती जाएगी।
सरकारी आंकड़े बताते है कि पत्रकारों के लिए महाराष्ट्र सबसे खतरनाक राज्य है। जेजे हत्याकांड के अतिरिक्त कई मामले पत्रकार और पत्रकार संस्थान से जुड़े हुए है। इस वजह से पिछले 12 साल से राज्य के पत्रकार संरक्षण कानून की लगातार मांग कर रहे थे। यहां चार दिन में एक पत्रकार की हत्या होना लाज़मी हैलेकिन महाराष्ट्र सरकार और मीडिया की जद्दोजहद से अब पत्रकार सुरक्षित महसूस करते हैं।
वहीं इन पत्रकारों की बाकि जिंदगी भी अच्छे से गुजर जाएं इसलिए सरकार द्वारा अब एक निर्णय इन पत्रकारों की सहायता के लिए लिया गया है। राज्य सरकार की योजना है कि प्रदेश के प्रत्येक पत्रकार को वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। यह वित्तीय सहायता पत्रकारों को पेंशन के रुप में उपलब्ध की जाएगी। मुख्यमंत्री की इस पहल की चहुंओर सराहना की जा रही है। महाराष्ट्र श्रमिक पत्रकार संघ (एमयूडब्ल्यूजे)नागपुर श्रमिक पत्रकार संघ (एनयूडब्ल्यूजे)तिलक पत्रकार भवन ट्रस्ट (टीपीबीटी) और नागपुर प्रेस क्लब ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस एवं वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार का आभार जताया है।


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