श्री गणेशाय नमः

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Friday, January 25, 2019

‘अस्मिता’ योजना



आधुनिकता के इस दौर ने भले ही पुरुषनारी का भेद मिटा दिया हैलेकिन आज भी नारियों के सम्मान की रक्षा एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस चुनौती का महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी अस्मिता योजना बकायदा सामना कर रही है। वैसे भी गांवों के देश भारत में बहुत सी बालिकाओं के सामने न सिर्फ आर्थिक चुनौती होती हैबल्कि कई ऐसी समस्याएं भी होती हैंजिससे उन्हें अक्सर दोचार होकर शर्मसार होना पड़ता है। कई बार तो किशोरियां अपने सम्मान के बारे में तनिक भी जागरूक भी नहीं होती। ऐसे में महाराष्ट्र शासन की ये योजना नारी सम्मान की पहचान बनकर उभरी है।
हाल ही में रिलीज हुई अक्षय की फिल्म पैडमैन’ ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में मासिक धर्म चक्र के दौरान स्वच्छता के विषय पर आधारित है। इसके जरिए इस मुद्दे को बखूबी उठाया गया था। इस प्रयास के बावजूद महिलाओं में अभी वह जागरूकता नहीं आ पाई हैजिसकी उम्मीद की गई थी। देश के गांवों की अनपढ़ एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं तथा किशोरी लड़कियों को निजि स्वास्थ एवं स्वच्छता हेतु जागरूक करने के लिए आठ मार्च 2018 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के ग्रामीण विकास और पंचायती राज्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सस्ती कीमत पर सेनेटर पैड्स उपलब्ध कराने वाली इस योजना का शुभारंभ किया गया था। इस योजना की घोषणा विगत वर्ष महिला एवं बाल कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री पंकजा मुंडे ने की थी। इस योजना के माध्यम से अनपढ़ एवं गरीब वर्ग की महिलाओं में निजि स्वास्थ एवं स्वच्छता के विषय में जागरूकता फैलाना है। एक सर्वेक्षण के अनुसार महाराष्ट्र के गांवों की केवल 17 प्रतिशत महिलाओं द्वारा सेनेटरी पैड्स का प्रयोग किया जाता है। इसका कारण सेनेटरी नेपकिन की मूल्य का ज्यादा होना है। इस कारण अस्मिता योजना के तहत महाराष्ट्र जिला परिषद् के स्कूलों में पढ़ने वाली 11-19 वर्ष की किशोरी लड़कियों को आठ पैड वाली सेनेटरी नैपकिंस की पैकेट केवल पांच रुपए की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
योजना का लाभ लेने के लिए छात्राओं को अस्मिता कार्ड बनवाना पड़ता है। इसके जरिए छात्राओं को प्रति महीने 5 रुपए देकर 8 सेनेटरी नैपकिन वाले एक पैकेट को खरीदना पड़ता हैजबकि सरकार प्रति पैकेट 15 रुपए 20 पैसे कि सब्सिडी देती है। सेनेटरी नैपकिन बनाने का काम स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं करती हैं। दरअसलगांव की महिलाएं एवं लड़कियां दवा के दुकान पर पुरुषों से सेनेटरी नेप्किंस खरीदने में शर्म महसूस करतीं हैं। इसके कारण भी पीरियड्स में सेनेटरी पैड्स का प्रयोग नहीं करती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए अस्मिता योजना के तहत महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा यूएमइडी महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एक नोडल एजेंसी नियुक्त किया है। इस एजेंसी द्वारा सेनेटरी पैड्स का लाभ उठाने वाली लड़कियों के स्वसहायता समूह का निर्माण किया जा रहा है और इस समूह की लड़कियों को अस्मिता कार्ड का वितरण किया जा रहा है। इन लड़कियों को गांव की महिलाओं एवं किशोरियों के बीच सेनेटरी नेप्किंस का प्रयोग करने हेतु जागरूकता फैलाने और बेचने का काम सौंपा गया हैताकि अस्मिता योजना का कार्यान्वयन सफलतापूर्वक पूरे राज्य में किया जा सके।
 दरअसलशासन की ये महत्वाकांक्षी योजना कई मायनों में लाभकारी है। अव्वल तो यह कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाएं भी इस योजना के माध्यम से सेनेटरी नेप्किंस का प्रयोग कर पाएंगी। दूसरे,अस्मिता कार्ड धारक लड़कियों की मदद से महिलाओं में अपने स्वास्थ और स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलेगी। सेनेटरी पैड्स के उपयोग द्वारा स्वच्छता के महत्व को समझ कर इसके प्रयोग करने से महिलाओं में होने वाले स्त्री रोगों में कमी आएगी। खासकर किशोरियां नियमित रूप से स्कूल में उपस्थित होकर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।लड़कियों में अपने निजि स्वास्थ एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता का विकास होगा। आपको बता दें कि स्पॉन्सर अस्मिता वेब पोर्टल का उद्देश्य महाराष्ट्र सरकार द्वारा अस्मिता योजना के तहत सब्सिडी दर पर सेनेटरी नेप्किंस उपलब्ध कराने में जनसाधारण की मदद प्राप्त करने के लिए अस्मिता फंड के लिए इस वेब पोर्टल का संचालन किया है। इसके तहत कोई भी एक बालिका को स्पॉन्सर एक वर्ष के लिए कर सकता है। न्यूनतम राशि 182.40 रुपए इस वेब पोर्टल के माध्यम से जमा करना होगा।
बता दें कि राज्य के 34 जिलों में जिला परिषद के स्कूलों की 2 लाख 78 हजार छात्राओं को अब तक अस्मिता कार्ड दिया गया है। हालांकि अब तक इसका इस्तेमाल सिर्फ 2500 छात्राएं ही कर रही हैं। उम्मीद है कि सरकार के प्रयास से इसमें तेजी आएगी। दरअसलइसमें गिरावट का मुख्य कारण अशिक्षा हैजो किशोरियों तक अपनी पैठ बनाने से रोक रहा है। प्रदेश में अस्मिता योजना को लागू करने वाली नोडल एजेंसी महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान (एमएसआरएलएम) के अधिकारियों की मानेंतो जिला परिषद स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राएं सेनेटरी नैपकिन खरीदने में संकोच कर रही हैं। कई स्कूलों की छात्राएं इसको खरीदने में हिचकती हैं। ऐसे में जिला परिषद स्कूलों में सेनेटरी नैपकिन के बारे में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सेनेटरी नैपकिन के उपयोग और उसके इस्तेमाल के फायदे बताने के लिए छात्राओं को पत्रक भी बांटे जा रहे हैं। सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार अस्मिता योजना के लिए जिला परिषद में पढ़ने वाली 3 लाख 60 हजार 523 छात्राओं ने पंजीयन कराया है। इसमें से दो लाख 78 छात्राओं को अस्मिता कार्ड दिया जा चुका हैजबकि 57 हजार 564 छात्राओं के डेटा का मिलान अभी तक नहीं हो पाया है। राज्य में अहमदनगर जिला परिषद स्कूलों की 9250, नागपुर की 603, अकोला की 2767, अमरावती की 10767, औरंगाबाद की 7682, बीड़ की 13037, भंडारा की 4101, बुलढाणा की 2419, चंद्रपुर की 4352,गडचिरोली की 3511, गोंदिया की 8721, वर्धा की 1710, वाशिम की 2386, यवतमाल की 4087, उस्मानाबाद की 9189, नांदेड़ की 2918, जलगांव की 6614, हिंगोली की 6411, जालना की 17886, लातूर की 8572, नाशिक की 353 छात्राओं को अस्मिता कार्ड मिल चुका है। पहले चरण में सात लाख छात्राओं को इस योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।

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