कहीं और दरक न जाए कांग्रेस की जमीन
कहावत है कि घर का भेदी लंका ढाए। कुछ ऐसे ही हालात मध्य प्रदेश में कांग्रेस के साथ भी बन रहे हैं। यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया बनाम दिग्विजय सिंह की आपसी रार से अब यहां ऐसी स्थिति बन चुकी है कि आपसी गुटबाजी कहीं कांग्रेस की लुटिया न डुबो दे। खबर है कि चुनावी क्षेत्र में जाने के लिए कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया को हेलिकॉप्टर नहीं दिया गया, तो कभी पर्याप्त फ्यूल।
टिकट वितरण के दौरान कांग्रेस में कलह की खबरों का हालांकि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही खंडन कर चुके हैं, परंतु कई ऐसे मौके आए जब इन दोनों दिग्गजों के मतभेद सामने आए। इससे पहले भी राहुल गांधी की मौजूदगी में ही ज्योतिरादित्य और दिग्विजय के बीच विवाद हुआ था। मुरैना जिले की जौरा सीट से शुरू ये विवाद दिनोंदिन बढ़ता ही चला गया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के उन फैसलों को भी गिना दिया, जिससे कांग्रेस को देशभर में नुकसान उठाना पड़ा। गुस्साए दिग्विजय सिंह ने यहां तक कह दिया कि ऐसा है, तो आप मुझे पार्टी से बाहर करवा दें। राहुल गांधी ने बीच बचाव करने की काफी कोशिश की, परंतु ना तो दिग्विजय सिंह चुप हुए और ना ही सिंधिया।
इसके विपरीत भाजपा अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत बनाने की कोशिश में जुटी रही है। अब जब मुद्दा राम, गाय और मुस्लिम-हिंदू वोटों पर आकर टिका है, तो इस मामले में भी शिवराज का पलड़ा कांग्रेस से भारी है। मध्य प्रदेश के तीन बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की 13 साल की सरकार में शायद ही कभी सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा हो। शिवराज ने सार्वजनिक मंचों पर 2014 से पहले टोपी पहनने से भी गुरेज नहीं किया। अकेले शिवराज सिंह का व्यक्तित्व को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी भरे मंच से उनकी बड़ाई भी कर चुके हैं। पिछले दिनों मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के प्रचार के लिए राहुल गांधी ने जब सागर एवं दमोह में आम सभाओं को संबोधित किया, तो इस दौरान उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला तो बोला, लेकिन सीएम शिवराज सिंह की तारीफ भी की। उन्होंने सीएम शिवराज सिंह को एक सभ्य नेता बताया।
ऐसे में हालात को देखें, तो इन नेताओं के आपसी रार और खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के शिवराज की बड़ाई किए जाने से इतना तो साफ हो गया है कि भले ही चुनाव में विपक्षी दल आमने-सामने हैं, लेकिन शिवराज सिंह को लेकर यह स्पष्ट है कि वे भाजपा से इतर उनका अपना व्यक्तित्व भी इस चुनाव में कांग्रेस पर हावी है। फिलहाल, यह तो जनता तय करेगी कि उसके लिए कौन उचित सरकार बना सकता है, लेकिन इतना जरूर है कि इसके लिए शिवराज सार्वजनिक रूप से सबकी पसंद बने हुए हैं।
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