नाडार परियोजना पर रोक से किसानों को भी होगा फायदा
सही मायनों में असली विकास वही है, जो विनाश की ओर न ले जाए। महाराष्ट्र में प्रस्तावित देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम रिफाइनरी ‘नाडार परियोजना’ से भले ही राज्य को काफी मुनाफा होता, पर इस 15 हजार एकड़ में प्रस्तावित परियोजना पर काम शुरू होने से 17 गांवों के किसानों और मछुआरों का विस्थापन भी तय था। पर्यावरण को जो नुकसान होता, वह अलग। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस वास्तव में इन मछुआरों, किसानों के मसीहा बन गए हैं और उन्होंने इस परियोजना पर रोक लगा दी है। दो टूक चेतावनी भी दी है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ कोई जबरन उसकी जमीन के अधिग्रहण की कोशिश करे, तो उस पर पुलिस अपराधिक मामला दर्ज करे।
कोंकण तट पर बसे विस्थापित होने वाले इन गांवों में से 15 गांव रत्नागिरि और दो गांव बगल के सिंधुदुर्ग में स्थित हैं। इस इलाकों में पर्याप्त बारिश होती है। यही वजह है कि विदर्भ और मराठवाड़ा के उलट इस उपजाऊ जमीन के किसानों ने बिना सरकारी कर्जमाफी योजनाओं के यहां काफी अच्छा उत्पादन किया है। परियोजना के लिए जरूरी 14,675 एकड़ (5.870 हेक्टेयर) जमीन में से सरकार के पास सिर्फ 126 एकड़ (52 हेक्टेयर) जमीन है, जबकि बाकी जमीन का अधिग्रहण होना था। परियोजना के लिए जिन 17 गांवों को चुना गया है, उनमें नानर, सागवे, तारल, करसिंघेवाड़ी, वडापल्ले, विल्लये, दत्तावाड़ी, पडेकावाड़ी, कटरादेवी, करविने, चौके, उपाडे, पडवे, सखर, गोठीवारे, गिरये और रामेश्वर शामिल हैं। इस परियोजना को 2022 तक पूरा होना था।
ऐसा पहली बार नहीं है, जब कोंकण में ये बड़ी परियोजना प्रस्तावित हुई। वहीं यह भी पहली बार नहीं, जब किसी परियोजना को राज्य में बड़े विरोध-प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा। साल 1992 में वेदांता की स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को रत्नागिरि के जदगांव गांव में 60 हजार टन सालाना कॉपर स्मेल्टर प्लांट और संबंधित सुविधाओं के लिए राज्य सरकार द्वारा 500 एकड़ जमीन का आवंटन किया गया था, पर इस परियोजना को आखिरकार तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थानांतरित करना पड़ा। इसके बाद 90 के दशक के ही शुरुआती वर्षों में दाभोल पॉवर कंपनी द्वारा निर्माणाधीन एक और परियोजना विवादों में आई।
फिलहाल, नाडार परियोजना से न सिर्फ किसानों, मछुआरों को नुकसान होता, बल्कि 14 लाख से ज्यादा आम, छह लाख काजू के पेड़ों, 500 एकड़ में फैले धान के खेतों और इलाके के वनस्पतियां और जीव-जंतु भी नष्ट हो जाते। इसका इस क्षेत्र के नाजुक तटीय पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ता। मुख्यमंत्री के हालिया इस आदेश से स्पष्ट है कि फडणवीस सरकार विकास के लिए विनाश को आमंत्रण नहीं देना चाहती है। सीएम देवेंद्र ने कहा है कि अब कोई भी भूखंड नहीं ले सकता है।